बलिया
अगर आप बलिया में दुकानदार हैं तो यह जरूरी खबर आपके लिए
बलिया के बाजारों में खाद्य तेल की व्यवस्था बदलने वाली है। एक बार तेल का इस्तेमाल करने के बाद उसी को बार-बार जलाने पर रोक लगने वाला है। दुकानों पर जले हुए खाद्य तेलों का इस्तेमाल अब ईंधन बनाने के लिए किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इसके लिए नया तरीका खोज निकाला है। अब दुकानदारों को जला हुआ तेल एक तय फर्म कंपनी को देना होगा। जो उसके इस्तेमाल से ईंधन बनाएगी।
शासन और गोरखपुर की एक फर्म कंपनी के बीच करार हुआ है। जो बलिया जिले के दुकानदारों से जले हुए तेल खरीदेगी और फिर उससे ईंधन का निर्माण करेगी। खाद्य सुरक्षा विभाग का कहना है कि स्वास्थ्य के नजरिए से यह शासन का बड़ा और उपयोगी कदम है। खाद्य सुरक्षा विभाग के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी दीपक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि “केंद्र सरकार की ओर से जले हुए खाद्य तेल के दोबारा उपयोग पर रोक लगाया गया है। केंद्र सरकार के इस आदेश का पालन अब बलिया जिले में भी कराना है।” उन्होंने आगे बताया कि “जिले में कोई भी व्यवसायी जले हुए तेल का इस्तेमाल करने के बजाए सीधे फर्म को बेचेंगे। जिस फर्म से करार किया गया है वह जिले में व्यवसायियों के डोर-टू-डोर तेल एकत्र करेगी। इस फर्म से छोटे से लेकर बड़े व्यवसायी तक जला हुआ तेल बेच सकेंगे।”
गौरतलब है कि होटलों में आमतौर पर एक ही बार के तेल को कई बार इस्तेमाल किया जाता है। एक बार चुल्हे पर चढ़ी तेल को कई बार जलाकर खाद्य सामग्री बनाई जाती है। खाद्य तेलों को कई बार जलाकर इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक होता है। डाक्टर बताते हैं कि इसके चलते ह्रदय की बीमारी भी पैदा होती है। मुख्या खाद्य सुरक्षा अधिकारी दीपक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि “अधिकतम तीन बार तक एक खाद्य तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन इसके बाद तेल का टोटल पोलर कंटेंट (टीपीसी) 25 से ज्यादा हो जाता है। सामान्य तेल का टीपीसी 5 होता है।” टीपीसी की जांच एक मशीन से की जाती है। अधिक टीपीसी वाले तेल मनुष्य शरीर के लिए हानिकारक होते हैं।
बता दें कि जिला प्रशासन इस काम के लिए दुकानदारों के फोन में ऑयल ब्रदर्स नाम का एक एप्प डाउनलोड कराएगी। इसी एप्प के जरिए फर्म कंपनी दुकानदारों से जला हुआ तेल खरीदेगी। इसके लिए कंपनी दुकानदारों के पास एक डिब्बा रखेगी। दुकानदारों को एक महीने तक हर दिन का जला हुआ तेल इसी डिब्बे में रखना होगा। महीने के अंत में फर्म कंपनी डिब्बे में भरे गए तेल को उठाकर ले जाएगी।
बलिया
अघोषित बिजली कटौती पर सपा युवजन सभा का हल्ला बोल, 9 सूत्रीय मांगों के साथ सौंपा ज्ञापन
भीषण गर्मी के बीच लगातार हो रही अघोषित बिजली कटौती और खराब विद्युत व्यवस्था को लेकर समाजवादी युवजन सभा ने विद्युत विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष अरविन्द गिरि के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता को 9 सूत्रीय मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की।
ज्ञापन में रघुनाथपुर, दुबहड़ और आईटीआई विद्युत उपकेंद्रों से जुड़े इलाकों में बार-बार हो रही बिजली कटौती पर रोक लगाने, जर्जर तारों को बदलने, कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, फीडरों और लाइनों का नियमित रखरखाव कराने तथा उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की गई।
इस दौरान गड़वार क्षेत्र में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिरने से बाधित बिजली आपूर्ति को बहाल कराने में व्यस्त अधिशासी अभियंता से दूरभाष पर वार्ता कर क्षेत्र की समस्याओं से अवगत कराया गया। उनकी अनुपस्थिति में विभाग द्वारा अधिकृत अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया।
अरविन्द गिरि ने कहा कि भीषण गर्मी में अघोषित बिजली कटौती से आम जनता, किसान, छात्र-छात्राएं, व्यापारी और छोटे व्यवसायी परेशान हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो समाजवादी लोग आम जनता के साथ मिलकर व्यापक जनआंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग और शासन-प्रशासन की होगी।
बलिया
बलिया में रोजगार का सुनहरा अवसर: 23 जून को लगेगा एक दिवसीय रोजगार मेला
बलिया। जिले के बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार पाने का बेहतरीन अवसर सामने आया है। जिला सेवायोजन कार्यालय, बलिया द्वारा 23 जून 2026 को एक दिवसीय रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह रोजगार मेला सतनी सराय स्थित तारा निवास गली, भृगु आश्रम के पास स्थित जिला सेवायोजन कार्यालय परिसर में आयोजित होगा।
मेले में निजी क्षेत्र की प्रतिष्ठित कंपनी विजन इंडिया ग्लोबल एल्यूमिनियम द्वारा अप्रेंटिसशिप के लिए योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जाएगा। इस पद के लिए 10वीं एवं आईटीआई उत्तीर्ण अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को ₹17,500 प्रतिमाह तक का वेतन प्रदान किया जाएगा।
कंपनी द्वारा निर्धारित आयु सीमा 18 से 28 वर्ष रखी गई है, जबकि चयनित अभ्यर्थियों का कार्यस्थल हैदराबाद (तेलंगाना) होगा। अभ्यर्थियों का चयन साक्षात्कार के माध्यम से उनकी योग्यता एवं क्षमता के आधार पर किया जाएगा।
जिला सेवायोजन कार्यालय ने बताया कि रोजगार मेले में प्रतिभाग करने वाले सभी अभ्यर्थियों का रोजगार संगम पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य है। कैंपस चयन की पूरी प्रक्रिया रोजगार संगम पोर्टल के माध्यम से संपन्न कराई जाएगी।
जिला प्रशासन ने अधिक से अधिक बेरोजगार युवाओं से इस अवसर का लाभ उठाने और समय पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ रोजगार मेले में उपस्थित होने की अपील की है।
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लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ा सवाल: क्या बलिया के कोचिंग संस्थान सुरक्षित हैं?
बलिया। लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों और अग्निशमन व्यवस्थाओं में गंभीर लापरवाही की बात सामने आई है, जिसके बाद कई जिलों में प्रशासन ने कोचिंग संस्थानों की जांच शुरू कर दी है।
इसी बीच बलिया जिले में भी बिना मानकों और पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के संचालित हो रहे सैकड़ों कोचिंग संस्थानों को लेकर चिंता बढ़ गई है। जिला मुख्यालय से लेकर बेल्थरा रोड, रसड़ा, सिकंदरपुर, बांसडीह और बैरिया जैसी तहसीलों तक अनेक कोचिंग सेंटर संकरी गलियों, बहुमंजिला भवनों और व्यावसायिक परिसरों में संचालित हो रहे हैं, जहां न तो अग्निशमन उपकरण दिखाई देते हैं और न ही आपातकालीन निकास की समुचित व्यवस्था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई कोचिंग संस्थान क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाकर कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। अधिकांश भवनों में फायर एनओसी, आपातकालीन निकास, अग्निशमन यंत्र और सुरक्षा मानकों की स्थिति की कभी जांच नहीं होती। ऐसे में यदि कोई दुर्घटना होती है तो हालात बेहद भयावह हो सकते हैं।
लखनऊ हादसे के बाद कानपुर समेत कई जिलों में प्रशासन ने सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और कई संस्थानों को सील भी किया गया है।
अब सवाल यह है कि क्या बलिया प्रशासन भी जिले में संचालित कोचिंग संस्थानों का व्यापक सर्वे कराएगा? क्या बिना मानक और बिना सुरक्षा व्यवस्था के चल रहे कोचिंग सेंटरों की जांच होगी? लखनऊ की त्रासदी ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
(यह जनहित से जुड़ा विषय है। प्रशासन को जिले के सभी कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था, फायर एनओसी और भवन मानकों की तत्काल जांच करानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी दुर्घटना से बचा जा सके।)
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