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बड़ी राहत: बलिया के 12 मरीज ठीक होकर लौटे अपने घर, डीएम बोले…..
बलिया डेस्क. कोरोना के खिलाफ चल रही लड़ाई में शुक्रवार को बड़ी सफलता मिली। बसंतपुर में बने एल-1 फैसिलिटी सेंटर में आइसोलेट किए गए 12 मरीज ठीक होकर अपने घर चले गए। इस बड़ी लड़ाई में जीत हासिल किए इन लोगों को शुभकामनाएं देने के लिए जिलाधिकारी एसपी शाही व संयुक्त मजिस्ट्रेट विपिन कुमार जैन भी वहां पहुंचे।
सभी मरीजों से हालचाल जाना, यहां की व्यवस्था संबंधित पूछताछ की और घर जाकर भी एक हफ्ते तक होम क्वॉरेंटाइन में रहने की सलाह दी। इसके बाद कुछ औपचारिकताएं पूरी करते हुए सभी मरीजों को एंबुलेंस से उनके घर की ओर रवाना किया गया।
ठीक होकर घर जाने वाले सभी युवकों से जिलाधिकारी ने कहा कि आप सबने कोरोना को हराया है, इसके लिए ढेर सारी शुभकामनाएं। कहा, घर जाकर भी कम से कम एक हफ्ते तक एकांतवास में रहेंगे।
घर के लोगों से भी फिलहाल दूरी बनाए रखेंगे। अगर सर्दी, खांसी, बुखार जैसे कोई भी लक्षण दिखाई दे तो अस्पताल नहीं जाएंगे, बल्कि उससे पहले कंट्रोल रूम को सूचित करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी लोगों को सरकार की ओर से एक हजार रुपये और राशन दिया जाएगा। उधर, मरीजों ने भी अस्पताल में मिली व्यवस्था पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि कभी ऐसा लगा ही नहीं कि हम अस्पताल में हैं।
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…जब डीएम समेत सभी मेडिकल स्टाफ का गर्व से सीना हुआ चौड़ा
बसन्तपुर स्थित एल-1 फैसिलिटी सेंटर पर शुक्रवार को एक समय ऐसा आया जब डॉक्टर्स, वार्ड बॉय व स्वच्छता कर्मियों को खुद पर इतना गर्व महसूस हुआ कि उनका सीना कई गुना चौड़ा हो गया। जी हाँ, स्वस्थ होकर बाहर आने के बाद जब मरीज अपने घर की ओर जाने लगे तब उन्होंने वहां ड्यूटी करने वाले सभी मेडिकल स्टाफ के लिए तालियां बजाई। एकस्वर से स्वस्थ होने वाले सभी मरीजों ने कहा कि सभी स्टाफ ने जिस तरह हम लोगों का ख्याल रखा, आयुष चिकित्सा का सहारा लेकर आयुर्वेदिक दवाएं दी, हमेशा साथ खड़े रहकर उत्साहित करते रहे, शायद इसी की देन है कि सब लोग सकुशल घर जा रहे हैं। जिलाधिकारी ने भी जब उनकी इन बातों को सुना तो उनको भी अपनी टीम पर गर्व हुआ। उन्होंने सभी की खुले दिल से सराहना करते हुए आगे भी इसी तरह काम करने को प्रेरित किया।
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खुशी से बोली बालिका, यहां जो आएगा ठीक होकर ही जाएगा
करीब 14 दिन पहले कोरोना पॉजिटिव मिली 13 वर्षीय बालिका भी ठीक होने वालों में शामिल थी। ठीक होने के बाद अस्पताल से जैसे ही वह निकली तो ऐसा लग रहा था जैसे मानो उसके पांव जमीन पर है ही नहीं। वह उत्साह से लबरेज थी। शायद उसके इसी उत्साह और हिम्मत की वजह से इतनी जल्दी रिकवर होने में मदद मिली होगी। बालिका के साथ उसकी मां भी थी। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से बालिका से बातचीत की और हाल जाना। इस पर उसका जवाब था कि यहां की व्यवस्था और यहां के स्टाफ बहुत ही अच्छे हैं। दुर्भाग्य से पॉजिटिव होने बाद यहां जो आएगा भी, वह निश्चित रूप से ठीक होकर ही जाएगा। इस पर जिलाधिकारी ने कहा कि यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है और यही हमारी उपलब्धि है।
मेडिकल स्टाफ की हौसलाअफजाई की
एल-1 अस्पताल में जिन्होंने 14 दिन तक ड्यूटी की है, डीएम श्री शाही ने उनका भी हालचाल जाना। लक्षण आदि के बारे में पूछताछ की। उन्होंने सबका उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि आज दर्जन भर मरीज ठीक होकर बाहर निकले, यह आप लोगों की बड़ी उपलब्धि है। आप लोग के साथ-साथ हम सबकी उपलब्धि है। उन्होंने स्वयं ताली बजाकर सभी मेडिकल टीम की हौसलाआफजाई की। मेडिकल टीम के सभी सदस्यों ने भी इसके लिए आभार जताया। यह पूरी टीम 14 दिन तक होटल में क्वारंटाइन में रहेगी। इस मौके पर एनएचएम के डीपीएम, महामारी रोग विशेषज्ञ जियाउल हुदा, डॉ केशव, डॉ शशि प्रकाश व आइसोलेट सेंटर में ड्यूटी करने वाले सभी मेडिकल स्टाफ मौजूद थे।
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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।


