बलिया
बलिया में निवेश के लिए 41 उद्यमियों ने दिया 1722.24 करोड़ का प्रस्ताव
बलिया जिले के विकास के लिए 41 उद्यमियों ने लगभग 1722.24 करोड़ रूपए निवेश का प्रस्ताव दिया है। ये उद्यमी मेडिकल शिक्षा, एयरपोर्ट, उद्यान, उच्च और तकनीकी शिक्षा, हैंडलूम, शहरी विकास, सूचना और प्रौद्योगिकी, बॉयो एनर्जी और डेयरी समेत मसाला उद्योग में निवेश करेंगे। इन उद्यमियों से मिले निवेश से बलिया में कई सकारात्मक बदलाव आ सकेंगे।
इससे साढ़े तीन हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। जिले में उद्योगधंधे न होने से अधिकतर लोगों को रोजगार की तलाश में महानगरों में पड़ता है। लेकिन अब निजी कारोबारियों के निवेश से करीब 3452 लोगों को घर पर ही रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।
अभी जिले में निवेश करने के लिए 41 कारोबारियों ने 1722.22 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया है। हालांकि इनमें विदेशी या बड़ी कंपनियां नहीं हैं। ज्यादातर जिले और प्रदेश से जुड़े बड़े कारोबारी हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उद्यमियों की ओर से जिले में अपनी इकाइयों की स्थापना करते हैं तो उन्हें विभाग की ओर से जमीन मुहैया कराई जाएगी।
इसके साथ ही ऋण भी दिलाया जाएगा। निवेश करने वालों को इसमें बकायदा छूट मिलेगी। औद्योगिक क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। होटल, रेस्टोरेंट, टूरिज्म, फ्लोर मिल, राइस मिल, डेयरी प्लांट, बॉयो फ्यूल हार्टीकल्चर, नमकीन उद्योग, पाइप, ऑयल मिल आदि क्षेत्रों में निवेश होगा। जमीन न होने पर निजी क्षेत्र में जमीन खरीदने पर स्टांप ड्यूटी में छूट मिलेगी। इसके साथ ही ऋण लेने पर अनुदान अथवा व्याज में छूट दी जाएगी।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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