दो नए केस के साथ बलिया में कोरोना मरीजों की संंख्या हुई 12, जानें कहां के है नए मरीज…….
बलिया डेस्क. जनपद में रविवार को दो और कोरोना पॉजिटिव केस मिलने से एक बार फिर से सनसनी फैल गयी. इस प्रकार अब कोरोना पाजिटिव मरीजों की संख्या बढ़कर कुल 12 हो गयी है. गौरतलव हो कि बीते 11 मई को पहला कोरोना पॉजिटिव केस सामने में आया था, जिसके बाद से ही जिले में हड़कंप की स्थिति थी, तब तक पहला केस के साथ आए नौ और युवकों की रिपोर्ट कोरोना पाजिटिव पाए जाने के बाद जिलाधिकारी ने बीते 15 मई को जनपद के कुल छह स्थानों को हाटस्पाट कर दिया था. इसबीच रविवार को दो और केस पॉजिटिव आ गया, इस प्रकार जनपद में अब कुल 12 कोरोना पॉजिटिव केस हो गया है.
कोरोना के रोकथाम के लिए युद्धस्तर पर जुटे जिला प्रशासन के लिए रविवार का दिन परेशानी भरा रहा. दो केस और मिल जाने से जनपद में एक बार फिर से खलबली मच गयी है. जिला महामारी रोग के नोडल अधिकारी डॉक्टर जियाउल हक हुदा ने बताया कि जांच के लिए भेजें गए नमूनों में दो और लोगों की रिपोर्ट पाजिटिव आई है. जिसमें एक बैरिया थाना क्षेत्र के दुर्जनपुर गांव का रहने वाला है, जो बीते दस मई को मुंबई से बलिया पहुंचा था. जबकि दूसरा रसड़ा तहसील क्षेत्र के परसिया गांव का है जो बीते 11 मई को दिल्ली से बलिया पहुंचा था. नोडल अधिकारी ने बताया कि जनपद में अब कुल कोरोना पॉजिटिव केस 12 हो गया है.
बलिया
Protected: 2027 में रसड़ा की सियासत कैसी होगी? सर्वे में सामने आए आंकड़े
बलिया
Protected: बेल्थरा रोड में टिकट से लेकर पार्टी तक, किसे पसंद कर रहे लोग? ऑनलाइन सर्वे में सामने आए चौकाने वालेआंकड़े
featured
राम गोविंद चौधरी की विरासत संभालने को तैयार रंजीत चौधरी, फिर उन्हें कमतर दिखाने की कोशिश क्यों?
बलिया। समाजवादी राजनीति में राम गोविंद चौधरी की पहचान और उनके लंबे राजनीतिक अनुभव की अपनी अहमियत रही है। अब उनके बेटे रंजीत चौधरी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। वह अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं, लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें आगे बढ़ने का पर्याप्त अवसर मिल रहा है या फिर उनके अपने ही राजनीतिक खेमे के कुछ लोग उन्हें कमतर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम गोविंद चौधरी के परिवार का पूरा ख्याल रखने की बात कही है। ऐसे में पार्टी के भीतर रंजीत चौधरी की भूमिका और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं स्वाभाविक हैं। अखिलेश यादव का यह आश्वासन राम गोविंद चौधरी के परिवार के प्रति पार्टी के रुख को दर्शाता है, लेकिन अब सवाल यह है कि इस भरोसे का जमीन पर कितना असर दिखाई देता है और रंजीत चौधरी को संगठन में किस तरह की भूमिका मिलती है।
राम गोविंद चौधरी की राजनीतिक विरासत केवल पारिवारिक पहचान तक सीमित नहीं है। इसमें उनका लंबा राजनीतिक संघर्ष समाजवादी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता और जनता के बीच बनाया गया आधार शामिल है। रंजीत चौधरी के सामने इस विरासत को आगे बढ़ाने के साथ अपनी अलग राजनीतिक पहचान स्थापित करने की चुनौती भी है।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि रंजीत चौधरी को लेकर कुछ लोग उन्हें अपेक्षित महत्व देने के बजाय उनकी भूमिका को सीमित करके पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया में उनकी राजनीतिक हैसियत और सक्रियता को किस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस तरह की चर्चाओं के पीछे किन लोगों की भूमिका है, इसे लेकर कोई ठोस तथ्य सामने आना जरूरी है।
राजनीतिक दलों में नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संगठन की भी होती है। यदि पार्टी नेतृत्व किसी वरिष्ठ नेता के परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा देता है, तो उस भरोसे को व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। रंजीत चौधरी को अपनी क्षमता साबित करने का अवसर देना और संगठन में उनकी भूमिका स्पष्ट करना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
अब निगाहें समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर हैं। अखिलेश यादव ने राम गोविंद चौधरी के परिवार का पूरा ख्याल रखने की बात कही है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रंजीत चौधरी को अपने पिता की राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने के लिए किस तरह का अवसर मिलता है। आखिरकार, विरासत को सम्मान देना केवल आश्वासन देने से नहीं, बल्कि योग्य अवसर और जिम्मेदारी देने से भी जुड़ा होता है।
-
सिकंदरपुर2 weeks agoसिकंदरपुर विधानसभा सर्वे 2027
-
बैरिया2 weeks agoबैरिया विधानसभा सर्वे 2027
-
बलिया स्पेशल2 weeks agoबलिया विधानसभा सर्वे 2027
-
बांसडीह2 weeks agoबांसडीह विधानसभा सर्वे 2027
-
फेफना2 weeks agoफेफना विधानसभा सर्वे 2027
-
रसड़ा2 weeks agoरसड़ा विधानसभा सर्वे 2027
-
बेल्थरा रोड2 weeks agoबेल्थरा रोड विधानसभा सर्वे 2027
-
featured3 days agoराम गोविंद चौधरी की विरासत संभालने को तैयार रंजीत चौधरी, फिर उन्हें कमतर दिखाने की कोशिश क्यों?


