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तो इस तरह से ख़त्म होगा बलिया से कोरोना ?
बलिया: बलिया के लोगों को जागरूक करने के लिए मंगलवार को एक अलग पहल देखने को मिली। जिलाधिकारी एसपी शाही, नोडल अधिकारी रंजन कुमार व सुजीत कुमार ने वर्चुवल रूप से जनपद के समस्त नगरीय व ग्राम स्तरीय अधिकारियों के अलावा आम जनता से जुड़कर कोविड-19 के बीच जनजागरूकता सम्बोधन दिए।
नोडल अधिकारी रंजन कुमार ने कोरोना पर कंट्रोल के लिए कई अहम टिप्स दिए। कहा कि अगर बताई गई सावधानी बरत लें तो कोरोना को जिले से भगा सकते हैं। ऐसा करें तो आपके जिले का ही नाम रोशन होगा। अपने सम्बोधन में उन्होंने कोरोना से मृत लोगों के प्रति श्रद्धाजंलि भी अर्पित की।
लोगों को सम्बोधित करते हुए रंजन कुमार ने कहा, मुझे खुशी है कि यहां डीएम रहा हूँ और एक बार फिर नोडल के रूप में आया हूँ। बताया कि फिजिकली तौर पर ही यह वायरस अंदर जा सकता है, इसलिए नाक-मुंह छुने से बचें। मास्क का उपयोग हमेशा करें। मास्क पहनने के साथ मास्क उतारने के तरीके पर भी ध्यान देने को कहा। उन्होंने स्वयं मास्क पहनने व उतारने के तरीके समझाए। कहा कि मास्क उतारने में लापरवाही से भी वायरस अंदर जा सकता है।
उन्होंने कहा, अगर कोई पॉजिटिव आ जाएं तो घबराएं नहीं। जो दवा मिल रही है उसे जरूर खाएं। घर पर जाने वाली टीम को सही-सही जानकारी दें। आठ घण्टे की नींद लें, दिन में भाप लें, प्रतिदिन तीन से चार लीटर गुनगुना पानी पीएं। सबसे जरूरी कि कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के जरिए अगर टीम सम्पर्क में आए लोगों की जानकारी लेती है तो सही-सही बताएं।
कोरोना एक सामान्य वायरस, सावधानी ही बचाव- रंजन कुमार ने कहा कि यह एक सामान्य वायरस है। अब तक इसका इलाज कोई नहीं निकला है। सावधानी ही इसका इलाज है। कहा, अगर शत प्रतिशत लोग सोशल डिस्टेंस बनाकर 14 दिन रह लें तो पूरे देश से ही यह वायरस दूर हो जाएगा। व्यवहार परिवर्तन करके ही हम आसानी से इस लड़ाई को जीत सकते हैं।
कुछ कमेंट्स के दिए जवाब- करीब सवा घण्टे तक चले लाइव संबोधन के दौरान बहुत सारे लोगों के कमेंट भी आए। जितना संभव हो सका, नोडल अधिकारी रंजन कुमार ने सवालों के जवाब दिए। उदाहरण के तौर पर एक कमेंट आया कि साबुन और सेनेटाइजर के प्रयोग में क्या फर्क है। इस पर नोडल अधिकारी ने बताया कि साबुन से हाथ को 45 सेकंड तक धोने से वायरस खत्म होगा, जबकि सेनेटाइजर से 20 सेकंड में वायरस घुलकर खत्म हो जाएगा। इसलिए साबुन कोई भी हो, लगातार हाथ धोते रहें।
भ्रमण के दौरान दिख रही लोगों की लापरवाही, इससे बचें- दूसरे नोडल व ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के सीईओ सुजीत कुमार ने कहा, कोरोना के प्रसार को रोकने के लिए बनी विभिन्न टीमों का सहयोग हर कोई करें। डरें नहीं, बल्कि टीम को सही-सही बात बताएं। अगर किसी को कोई कन्फ्यूजन हो तो कंट्रोल रूम में फोन कर दूर कर लें। सबसे जरूरी है कि मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंस बना कर रखें। मास्क पहनने के तरीके भी समझाए।
भ्रमण के दौरान ई-रिक्सा पर चार-पांच लोग, और वह भी बिना मास्क के दिख जाए रहे हैं। कोरोना से बचने के लिए ऐसी लापरवाही से इससे बचना होगा।
रखें ऑक्सीमीटर, जरूरी हो तभी घर से निकलें- जिलाधिकारी ने नोडल अधिकारी द्वय और अपना समय निकालकर महत्वपूर्ण सन्देश को सुनने वाली आम जनता के प्रति आभार जताया। कहा कि बचाव ही सबसे बेहतर तरीका है। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि थरमामीटर व पल्स ऑक्सीमीटर जरूर रखें। इसके महत्व को समझाया। ऑक्सीजन लेवल 90 से कम होने पर तत्काल कंट्रोल रूम को फोन करके अस्पताल चले जाएं।
इस प्रकार जागरूक होकर आप स्वयं की सुरक्षा कर सकते हैं। उन्होंने अपील किया कि बहुत जरूरी हो तो ही घर से निकलें। बाहरी समाज मे रहने वाले लोग इवरमेक्टिम दवा जरूर खाएं। यह प्रभावी साबित हुई है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। इस दौरान सीडीओ विपिन जैन, एडीएम रामआसरे, सीएमओ डॉ जितेंद्र पाल, डिप्टी कलेक्टर सर्वेश यादव आदि थे।
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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।





