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बलिया के ग्रामिण इलाकों में चार-पांच घंटे बिजली कटौती की ये है वजह!

विद्युत उत्पादन इकाइयों में कोयले की उपलब्धता कम हो गई है। कोयले की कमी का असर बिजली उत्पादन और बिजली आपूर्ति पर दिख रहा है। बलिया जिले में बिजली आपूर्ति कम कर दी गई है। दिन में चार से पांच घंटे तक बिजली कटौती की जा रही है। जिसकी वजह से आम लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। गर्मी का समय होने की वजह से चार-पांच घंटे की कटौती भारी पड़ रही है। विद्युत वितरण खंड द्वितीय ने दिन भर में ग्रामीण इलाकों के लिए चार घंटे की कटौती का रोस्टर तय किया गया है।

उत्तर प्रदेश के विद्युत उत्पादन इकाइयों में कोयले की कमी चल रही है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बीते गुरूवार को ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने बिजली आपूर्ति में आ रही दिक्कतों के लिए उपभोक्ताओं के सामने खेद प्रकट किया। श्रीकांत शर्मा ने कहा है कि “केंद्र सरकार और कोल इंडिया लिमिटेड के सहयोग से आपूर्ति सामान्य करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।”

बलिया जिले में हर दिन आमतौर पर 38 मेगावाट बिजली की खपत होती है। विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता चंद्रेश उपाध्याय ने कहा है कि जिले के ग्रामिण इलाकों में चार घंटे का रोस्टर तय किया गया है। ताकि बिजली की खपत कम की जा सके। चंद्रेश उपाध्याय ने लोगों से अपील की है कि धैर्य बनाए रखें। सरकार इस परेशानी को दूर करने की कोशिश कर रही है। बहुत घबराने की आवश्यकता नहीं है।

क्यों हुई कोयले की कमी? उत्तर प्रदेश के विद्युत उत्पादन इकाइयों में कोयले की आपूर्ति ठप हो गई है। कोयले का भंडारण भी कम हो गया है। बता दें कि पूरे देश में सत्तर फिसदी बिजली का उत्पादन कोयले से ही होता है। कहा जा रहा कि देश में कोयले के खनन में कमी आई है जिसके चलते यह संकट पैदा हुआ है। बताया जा रहा है कि भारी बरसात होने के चलते कोयला खनन के काम में मंदी आई है। खनन कम होने की वजह से बिजली पैदा करने वाली इकाइयों में कोयला की सप्लाई घट गई है। इस वजह से बिजली के उत्पादन पर असर पड़ रहा है।

Akash Kumar

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