इस साल बादल बलिया से कुछ नाराज चल रहे हैं। जुलाई का महीना बीतने को है लेकिन अभी तक जनपद में तेज बारिश नहीं हुई। जिसके चलते सूखे के हालत बन रहे हैं, गर्मी-उमस से लोग परेशान हैं वहीं बुधवार को बारिश होने से जनपदवासियों को थोड़ी राहत मिली और किसानों के चेहरे भी खिल उठे। वहीं बारिश के बाद शहर में जलभराव की स्थिति भी देखने को मिली।
बता दें कि बलिया में बारिश न होने से धान की फसल, बाजरा, मक्का, साग-सब्जी सूख रहे थे। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंता की लकीरे थी, लेकिन बुधवार हुई झमाझम बारिश ने खेतों की प्यास बुझा दी। हालांकि इस बारिश से शहरी इलाकों में जलभराव भी हुआ। कलेक्ट्रेट परिसर में पानी भरने से परेशानी का सामना करना पड़ा।
वहीं कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनपद में इस बार खरीफ की खेती का लक्ष्य एक लाख 58 हजार 542 हेक्टेयर रखा गया था। खरीफ की मुख्य फसल धान के लिए एक लाख 14 हजार 834 हेक्टेयर, मक्का के लिए 31 हजार 536 हेक्टेयर, बाजरा के लिए 2036 हेक्टेयर तथा ज्वार के लिए 2131 हेक्टेयर निर्धारित है। विभाग ने दावा किया है कि अब तक धान की रोपाई 59 हजार 710 हेक्टेयर में, मक्का 10 हजार 632 हेक्टेयर में, बाजरा 921 हेक्टेयर में और ज्वार की 730 हेक्टेयर में बुआई हो चुकी है।
लेकिन धरातल पर स्थिति कुछ अलग है। धरातल पर धान की रोपाई 25 से 30 फीसदी ही हो सकी है। लेकिन समय पर बरसात नहीं होने से मक्का, ज्वार, बाजरा की बुआई केवल 10 से 15 प्रतिशत हुई है। इसके चलते पशुपालकों के सामने चारे का संकट खड़ा हो गया है। जिसके चलते भूसे के दाम 8 रुपए किले से बढ़कर 12-14 रुपए किलो पहुंच गए हैं।
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