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पंचायत चुनाव- आरक्षण सूची के इंतजार के बीच चुनाव चिह्न तय, ग्राम प्रधान पद के लिए सबसे अधिक सिम्बल !

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प्रदेश में इस समय त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को तैयारियां रफ्तार से चल रही हैं। मतदान की प्रक्रिया को अधिसूचना का इंतजार है। इस बार मतदान के दौरान ग्राम प्रधान के पद पर 45 लोग चुनाव लड़ने का एक गांव से प्रवाधान होगा। प्रधानी के चुनाव में 45 लोग दावेदार हो सकेंगे। इनके लिये अलग-अलग चुनाव चिह्न का मतपत्र होगा।  बता दें कि इस बार चुनाव के लिये मतपत्र पर तोप से लेकर हवाई जाहज (प्लेन) तक का चिह्न भी रहेगा। इसके अलावा उगता सूरज, हल जोतता किसान, इमली, अनार, पुस्तक जैसे चिह्न रहेंगे। जिनके माध्यम से प्रधानों की पांच वर्ष के लिये किस्मत लिखी जायेगी।

तीनों चुनाव के अलग-अलग होंगे मतपत्र

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने वाला है। इसके लिये तीन प्रकार के अलग-अलग मतपत्र मिलेंगे। जिसमें ग्राम प्रधान पद के लिये अलग, वार्ड सदस्य के लिये अलग, जिला पंचायत सदस्य पद के लिये अलग मतपत्र मिलेगा। तीनों मतपत्रों के अलग-अलग रंग होंगे, जिन पर मतदान करके मतपेटिका में मतपत्र डाला जायेगा। बदायूं के सहायक चुनाव अधिकारी डॉ. पीएस पटेल कहते हैं कि निर्वाचन आयोग से मतपत्र आ गये हैं, चुनाव चिह्न प्रकाशित हैं। चुनाव में काफी ज्यादा संख्या में चुनाव चिह्न हैं और अलग-अलग पद के लिये मतपत्र आये हैं। प्लेन और हल जोतता किसान जैसे कई चिह्न पुराने भी हैं। बाकी कुछ नये चिह्न आये हैं। प्रशासन निर्वाचन की तैयारियां जोरशोर से कर रहा है।

किस पद के लिए क्या चुनाव चिह्न : 

ग्राम पंचायत सदस्य के लिए आम, पेंसिल, ओखली, फरसा, अंगूर, बंदूक, केला, बैडमिंटन का बल्ला, गुलाब का फूल, ब्रुश, घड़ा, ब्लैकबोर्ड, डमरू, रिक्शा, तंबू, शंख, नल और सुराही चिह्न तय हैं।

जिला पंचायत का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए कुल 53 प्रतीक चिह्न उपलब्ध होंगे। इनमें आरी, गिटार, उगता सूरज, घुड़सवार, कप और प्लेट, चश्मा, कलम और दवात, छड़ी, कुल्हाड़ी, छाता, केतली, झोपड़ी, कैंची, टाइपराइटर, क्रेन, टेलीफोन, खजूर का पेड़, टेलीविजन, गमला, ट्रैक्टर, ढ़ोलक, रोड रोलर, तरकस, लट्टू, तराजू, लाऊडस्पीकर, ताला चाभी, वृक्ष, थरमस, शेर, नाव, सितारा, पिस्टल, सिर पर कलश लिए स्त्री, फसल काटता किसान, सीटी, फावड़ा बेल्चा, सैनिक, बल्ला, स्कूटर, मछली, हथठेला, रेडियो, हल, हेलीकाप्टर, सीमेंट की बोरी, कटहल, सूटकेस, मेज, हैंगर, मोबाइल फोन, लहसुन और सपेरा शामिल हैं।

ग्राम प्रधान पद के लिए अनाज ओसाता हुआ किसान, गले का हार, इमली, घंटी, कन्नी, चारपाई, कार, चूड़ियां, किताब, छत का पंखा, कैमरा, टेबिल लैंप, कैरम बोर्ड, टोकरी, कोट, डेस्क, खड़ाऊं, ड्रम, गदा, तांगा, तोप, फूल और घास, त्रिशूल, बल्लेबाज, दरवाजा, बस, धनुष, बांसुरी, धन का पेड़, बाल्टी, पत्तियां, बिजली का खंभा, पहिया, बिजली का बल्ब, पालकी, बेंच, पुल, बैलगाड़ी, फावड़ा, भवन, फुटबाल, भुट्टा, मोटर साइकिल, ऊन का गोला, मोमबत्ती, कंघा, रिंच, गुब्बारा, लिफाफा, गैस सिलेंडर, वायबुयान, टमाटर, हथौड़ा, दीवार घड़ी, आइस क्रीम, प्रेशर कुकर और अलमारी चिह्न तय हैं। क्षेत्र पंचायत सदस्य पद के लिए 36 प्रतीक चिह्न आवंटित किए गए हैं। इनमें अनार, गेंद और हाकी, अलाव और आदमी, चकला बेलन, अंगूठी, चिड़िया का घोसला, आटा चक्की, जीप, ईंट, टार्च, कढ़ाही, टेबिल फैन, कांच का गिलास, टैंक, कुंआ, टोपी, केला का पेड़, तलवार, गुल्ली डंडा, दमकल, नारियल, लेटर बाक्स, पतंग, शहनाई, पानी का जहाज, सरौता, प्रेस, सिलाई मशीन, फ्राक, स्टूल, भगौना, स्लेट, रेल का इंजन, हंसिया, लड़का लड़की और हारमोनियम शामिल हैं।

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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न

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26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।

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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र

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बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।

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