बांसडीह
मणिमंजरी केस में आरोपी रहे ईओ क़े ख़िलाफ़ हुए दो तिहाई सभासद, दोबारा चार्ज लेने पर आपत्ति !
बलिया डेस्क : नगर पंचायत मनियर की ईओ मणिमंजरी राय की मौत में आरोपित रहे सिकंदरपुर के ईओ को दुबारा नगर पंचायत मनियर का चार्ज मिलने की संभावना पर नगर पंचायत के दो तिहाई सभासदों ने एसडीएम बांसडीह दुष्यंत कुमार मौर्य को ज्ञापन देकर दुबारा चार्ज न दिलाने की मांग की है।
सभासदों ने कहा कि सिकन्दरपुर के ईओ संजय राव पूर्व में नगर पंचायत मनियर के चार्ज पर रह चुके है। उन्होंने आरोप लगाया कि अपने कार्यकाल में ईओ भष्टाचार में डूबे रहे। आपकी अध्यक्षता में बनी कमेटी में 12 बिन्दुओं पर हुई जांच में अध्यक्ष व सिकन्दरपुर के ईओ दोषी भी पाये गये थे। उन पर कार्रवाई भी लम्बित है।
मांग पत्र मे दर्शाया है कि अधिशासी अधिकारी पर नगर पंचायत मनियर के सभासदों की शिकायतों पर लोकायुक्त की जांच भी चल रही है। अपने ऊपर चल रही जांच को प्रभावित करने के लिए वह तथ्यों को छिपाकर नगर पंचाच मनियर का चार्ज लेने के लिए आदेश कराया है। आये हुए आदेश को निरस्त करने हेतु जिलाधिकारी द्वारा पत्र भी शासन में भेजा जा चुका है। पत्र में दर्शाया गया है कि यदि सिकन्दरपुर के ईओ को मनियर का चार्ज दिलाया गया तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर अपने उपर चल रही जांच को प्रभावित करेंगे।
सभासदों का आरोप है कि पूर्व में रही ईओ मणिमंजरी राय की आत्महत्या के मामले में तीन माह तक फरार भी रह चुके हैं। जनहित व न्याय की दृष्टि से अधिशासी अधिकारी सिकन्दरपुर को नगर पंचायत मनियर का चार्ज न दिलाया जाय। इस मौके पर सभासद अंजनी कुमार सिंह, अमरेन्द्र सिंह, धनजी प्रजापति, मीरा देवी, प्रभूनाथ उपाध्याय, शिल्पी देवी, गायत्री देवी, विनय सिंह, अमित आदि मौजूद रहे।
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राम गोविंद चौधरी की विरासत संभालने को तैयार रंजीत चौधरी, फिर उन्हें कमतर दिखाने की कोशिश क्यों?
बलिया। समाजवादी राजनीति में राम गोविंद चौधरी की पहचान और उनके लंबे राजनीतिक अनुभव की अपनी अहमियत रही है। अब उनके बेटे रंजीत चौधरी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। वह अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं, लेकिन सवाल उठ रहा है कि क्या उन्हें आगे बढ़ने का पर्याप्त अवसर मिल रहा है या फिर उनके अपने ही राजनीतिक खेमे के कुछ लोग उन्हें कमतर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं?
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम गोविंद चौधरी के परिवार का पूरा ख्याल रखने की बात कही है। ऐसे में पार्टी के भीतर रंजीत चौधरी की भूमिका और उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं स्वाभाविक हैं। अखिलेश यादव का यह आश्वासन राम गोविंद चौधरी के परिवार के प्रति पार्टी के रुख को दर्शाता है, लेकिन अब सवाल यह है कि इस भरोसे का जमीन पर कितना असर दिखाई देता है और रंजीत चौधरी को संगठन में किस तरह की भूमिका मिलती है।
राम गोविंद चौधरी की राजनीतिक विरासत केवल पारिवारिक पहचान तक सीमित नहीं है। इसमें उनका लंबा राजनीतिक संघर्ष समाजवादी विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता और जनता के बीच बनाया गया आधार शामिल है। रंजीत चौधरी के सामने इस विरासत को आगे बढ़ाने के साथ अपनी अलग राजनीतिक पहचान स्थापित करने की चुनौती भी है।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि रंजीत चौधरी को लेकर कुछ लोग उन्हें अपेक्षित महत्व देने के बजाय उनकी भूमिका को सीमित करके पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया में उनकी राजनीतिक हैसियत और सक्रियता को किस तरह प्रस्तुत किया जा रहा है, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस तरह की चर्चाओं के पीछे किन लोगों की भूमिका है, इसे लेकर कोई ठोस तथ्य सामने आना जरूरी है।
राजनीतिक दलों में नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संगठन की भी होती है। यदि पार्टी नेतृत्व किसी वरिष्ठ नेता के परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा देता है, तो उस भरोसे को व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। रंजीत चौधरी को अपनी क्षमता साबित करने का अवसर देना और संगठन में उनकी भूमिका स्पष्ट करना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
अब निगाहें समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर हैं। अखिलेश यादव ने राम गोविंद चौधरी के परिवार का पूरा ख्याल रखने की बात कही है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रंजीत चौधरी को अपने पिता की राजनीतिक विरासत आगे बढ़ाने के लिए किस तरह का अवसर मिलता है। आखिरकार, विरासत को सम्मान देना केवल आश्वासन देने से नहीं, बल्कि योग्य अवसर और जिम्मेदारी देने से भी जुड़ा होता है।
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बांसडीह विधानसभा सर्वे 2027
बांसडीह की राजनीति हमेशा से बलिया की सबसे चर्चित सियासी ज़मीन रही है। 2027 से पहले बलिया ख़बर जानना चाहता है कि क्षेत्र की जनता विधायक केतकी सिंह के कामकाज को कितने नंबर देती है, और अगली बार किस पार्टी व किस नेता पर भरोसा जताना चाहती है। नीचे दिए सर्वे में अपनी बेबाक राय दें।
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बलिया में स्वास्थ्यकर्मियों का विरोध : बेरूआरबारी प्रभारी चिकित्साधिकारी के खिलाफ धरने पर बैठे कर्मचारी!
बलिया। जनपद के बेरूआरबारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में बुधवार को स्वास्थ्यकर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा। प्रभारी चिकित्साधिकारी के खिलाफ नाराजगी जताते हुए स्वास्थ्यकर्मी पीएचसी परिसर में धरने पर बैठ गए और जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों ने प्रभारी चिकित्साधिकारी को तत्काल हटाए जाने की मांग की।
स्वास्थ्यकर्मियों का आरोप है कि प्रभारी चिकित्साधिकारी का व्यवहार कर्मचारियों के प्रति अभद्र और अपमानजनक है। इसके अलावा केंद्र पर अनियमितता और कार्यस्थल पर मनमानी का माहौल है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि कई बार उच्चाधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
धरने पर बैठे स्वास्थ्यकर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को जिला स्तर पर तेज किया जाएगा।
धरना प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही स्थानीय स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों में हलचल मच गई। फिलहाल मामले को शांत कराने के लिए बातचीत की कोशिशें जारी हैं।
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