बलिया के इस गांव ने छेड़ी स्वच्छता की अनोखी मुहिम, हर तरफ हो रही तारीफ़

बलिया : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने स्वच्छता को जो मंत्र दुनिया को दिया उसकी मिसाल बलिया जिले का छितौनी गांव बन गया है। इस गांव के चार युवाओं ने सफाई को लेकर जो मुहिम छेड़ी थी, अब वो बढ़ती जा रही है। गांव के बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सफाई अभियान का अंग बन चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रेरणा से देश में जो स्वच्छता अभियान का बीड़ा उठाया, उससे इस गांव के चार युवा सबसे पहले 2016 में प्रभावित हुए। शिवरात्रि पर बलिया के बांसडीहरोड थाना के छितौनी गांव स्थित छितेश्वर नाथ मंदिर में लगने वाले मेले से इस अभियान को शुरू करने का फैसला किया गया। सबसे पहले मंदिर परिसर में वर्षों से गंदगी का अंबार बने तालाब को साफ करने का बीड़ा उठाया गया।

संडे बन गया सफाई डे

संडे मतलब आराम का दिन सोचने वाले लोगों के लिए यह गांव एक सीख दे रहा है। इस गांव में संडे का मतलब सफाई डे है। हर रविवार को सुबह साढ़े पांच बजे से साढ़े सात बजे तक दो घंटे के इस सफाई अभियान में युवाओं से लेकर गांव के बच्चे-बच्चे भी जुड़ जाते हैं। संडे को हाथ में झाड़ू झौव्वा लेकर सफाई में जुटने वाले 80 फीसदी लोग अध्यापक, वकील के साथ सरकारी पेशे से जुड़े हैं। सबसे खास बात यह है कि इस सफाई डे में हिस्सा लेने के लिए जिले से सटे बिहार में भी नौकरी करने वाले लोग शनिवार की रात को पहुंच जाते हैं। दो घंटे सफाई करने के फिर जहां नौकरी करते हैं वहां लौट जाते हैं।

चार लोगों की मुहिम में अब तक कई लोग

समिति के सदस्य व बिहार के सिवान जनपद में सरकारी शिक्षक मनोज कुमार दुबे ने बताया कि प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान से प्रेरणा लेकर हम युवाओं ने यह मुहिम छेड़ी है। ढाई साल पहले 4 लोगों से इसे शुरू किया। इस अभियान में अब 300 लोग जुड़ चुके हैं। हम सब मिलकर अपने इस गांव को स्वच्छता के संदर्भ में अलग पहचान दिलाने की कोशिश में है। स्वच्छता समिति के अध्यक्ष कौशल मिश्र ने बताया कि इसी स्वच्छता अभियान को लेकर जुलाई 2017 में छत्तीसगढ़ सरकार ने इस समिति को स्वच्छता समिति के अवॉर्ड से भी पुरस्कृत किया है। इस अभियान से जुड़े एक शिक्षक सुनील कुमार बताते हैं कि सफाई और स्वच्छता के द्वारा ही हम अपनी पहचान बना सकते हैं और इसी वजह से मैं इस अभियान से जुड़ा हूं और मेरे द्वारा अन्य कई शिक्षकों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। बाबा छितेश्वर नाथ मंदिर के पुजारी भी इस मुहिम से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि रोज मां दुर्गा और बाबा की पूजा करने के बाद एक घंटा नियमित रूप से इस ऐतिहासिक पोखरे की सफाई में लगा रहता हूं।

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