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बलिया की रहने वाली थी शहाजहांपुर में ट्रेन की गिरफ्त में आकर जान गंवाने वाली महिला

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शाहजहांपुर में दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाली महिला बलिया की रहने वाली थी। 65 वर्षीय महिला अपने बेटे के साथ चंडीगढ़ से वापस अपने घर हरिहर एक्सप्रेस से जा रही थीं। तभी लौटते वक्त यह हादसा हो गया।

जानकारी के मुताबिक 65 वर्षीय महिला किसमतिया देवी अपने विकलांग बेटे विनोद के साथ चंड़ीगढ़ में 6 महीने से रह रही थी। बुधवार को किसमतिया अपने बेटे के साथ हरिहर एक्सप्रेस ट्रेन से बलिया जाने के लिए निकली थी।

बेटे के मुताबिक बरेली में ट्रेन रुकी थी। वहां दोनों ने साथ बैठकर खाना खाया। दोनों सो गए, तभी कुछ देर बाद बेटे की आंख खुली तो मां सीट पर नहीं थी। तलाश करने पर भी कुछ पता नहीं चल सका। इसके बाद बेटे ने जीआरपी को सूचना दी। उसके बाद पुलिस उसको थाना कटरा लेकर गई। जहां उसको शव मिले कई टुकड़े दिखाए गए। उसी से विनोद ने शव की पहचान अपने बेटे के रूप में की है। थाना प्रभारी धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि, महिला की शिनाख्त उसके बेटे ने की है। दोनों चंडीगढ़ से वापस बलिया जा रही थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था ।

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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र

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बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।

जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।

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