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बलिया

घर में ही तरावीह की नमाज पढ़ते थे  ‘पैगंबर’ , हदीस की इस किताब में है इस बात का जिक्र

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बलिया. इस्लाम में नौवें महीने को रमजान का महीना कहा जाता है, इस महीने में तीस दिनों तक उपवास करना प्रत्येक मुस्लिम के लिए अनिवार्य बताया गया है. दुनिया के सभी मुसलमानों के लिए यह उपवास का महीना होता है, उपवास के लिए जो अरबी शब्द बोला जाता है उसे कहते हैं ‘साम’ इसका शाब्दिक अर्थ है संयम करना. सॉम शब्द इस महीने की सच्ची भावना को दर्शाता है और इसमें सूर्योदय से सूर्यास्त होने तक उपवास रखना होता है. फिर रोजेदार खजूर और पानी से रोजा खोलते हैं.
हाफिज अमीरूद्दीन के अनुसार रमजान में मुस्लिम समाज एक अतिरिक्त नमाज पढ़ते हैं, जिन्हें तरावीह कहा जाता है. तरावीह की नमाज रात की नमाज के बाद मस्जिद में सामूहिक रूप से पढ़ी जाती है. इस नमाज में पूरा कुरआन रमजान महीने के अंदर पढ़ा जाता है. रमजान में कुरआन पढ़ने पर अत्यधिक जोर दिया गया है.ताकि प्रत्येक रोजेदार इस पर चिंतन कर सकें. लेकिन कोरोना से उपजे संकट के बाद मुस्लिम चिंतित है कि वे तरावीह की नमाज कैसे अदा करेंगे. लेकिन यह कोई चिंता का विषय नहं है. हाफिज जी ने बताया कि हदीस की किताब अल-बुखारी में आता है कि इस्लाम के पैगंबर तरावीह की नमाज अकेले घर पर पढ़ते थे, मस्जिद में नहीं.
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पैगबंर इसलिए घर में पढ़ते थे तरावीह नमाज
हाफिज अमीरूद्दीन बताते हैं कि पैगंबर साहब के घर में तरावीह की नमाज अदा करने के पीछे वजह यह थी कि एक व्यक्ति अकेले में जैसे ध्यान लगा सकता है, वैसा कई बार समूह लगा पाना मुश्किल होता है. आज हम सब एक ऐसी समस्या का सामना कर रहे हैं, जो अप्रत्याशित है और चिंताजनक है. इस संकट से निकलने के लिए हम सबको असाधाराण सोच पैदा करने की आवश्यकता है. कोरोना वायरस ने आज विश्व के किसी भी देश को नहीं बख्शा है. आज समाज का एक बड़ा हिस्सा इसके कारण भय और चिंता में है. जबकि कुछ लोग अभी भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. वे यह समझने में असफल है कि खतरा वास्तविक है और अगर हमें अपने साथ अपने घरवालों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है तो सरकार के दिशानिर्देश का पूरी तरह पालन करना होगा और पूरी एहतियात बरतनी होगी.
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हज़रत मुहम्मद साहब की इन बातों पर गौर करें
हदीस की एक पुस्तक अल-तिर्मिधि में आता है कि एक बार एक व्यक्ति हज़रत मुहम्मद साहब के पास आया लेकिन उसने अपना ऊंट नहीं बांधा था. पूछने पर उसने कहा कि उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसे ख़ुदा पर भरोसा है. यह सुनकर पैग़म्बर साहब ने उससे कहा, “जाओ पहले ऊंट को बांधो और फिर ख़ुदा पे भरोसा रखो”. इस हदीस से यह स्पष्ट हो जाता है कि ख़ुदा पे भरोसा करना है, लेकिन पहले अपनी तरफ़ से पूरी एहतियात बरतनी है. आज यह सिर्फ़ केंद्र सरकार या राज्य सरकार की अकेले की ज़िम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक भारतीय की ज़िम्मेदारी है कि वे वायरस को आगे फैलाने का कारण ना बनें. इस्लाम में जीवन बचाने को एक कर्तव्य के रूप में बताया गया है. जिसमें व्यक्ति को पूरी कोशिश करनी होती है कि वे व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन की सुरक्षा के लिए निरंतर प्रयास करें.

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बलिया

शिक्षा पदम सम्मान 2025 से सम्मानित हुए हाली पाथ कॉन्वेंट स्कूल के युवा निदेशक डॉ. परवेज अंसारी

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हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित हिलटॉप पब्लिक स्कूल में आयोजित भव्य सम्मान समारोह में हाली पाथ कॉन्वेंट स्कूल के युवा निदेशक डॉ. परवेज अंसारी को “शिक्षा पदम सम्मान 2025” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उनके 10 वर्षों से अधिक की समर्पित सेवा और अभिनव प्रयासों के लिए प्रदान किया गया।

डॉ. अंसारी की नेतृत्व क्षमता और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता ने स्कूल को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। उनके मार्गदर्शन में हाली पाथ कॉन्वेंट स्कूल ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया है।

सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. परवेज अंसारी ने कहा —

“यह सम्मान मेरे लिए प्रेरणा का स्रोत है। मैं शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार और सुधार के लिए प्रयासरत रहूँगा।”

उनकी इस उपलब्धि से न केवल स्कूल परिवार बल्कि पूरे जनपद में गर्व की भावना व्याप्त है।

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फेफना

दिखाया जज़्बा: जमुना राम मेमोरियल स्कूल के कराटे वीरों ने जीते 22 पदक, बलिया में बजाया अपना डंका

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बलिया के बापू भवन में आयोजित 2nd Gyanti Devi Memorial Cup District Karate Championship 2K25 में जिले के लगभग 15 विद्यालयों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में जमुना राम मेमोरियल स्कूल, मानपुर चितबड़ागांव के 22 छात्रों ने प्रतिभाग कर दमखम दिखाया।

शानदार प्रदर्शन करते हुए स्कूल के 12 छात्रों ने स्वर्ण पदक , 6 ने रजत पदक  और 4 ने कांस्य पदक हासिल किए। छात्रों की इस उपलब्धि ने न केवल विद्यालय का नाम रोशन किया बल्कि माता-पिता और क्षेत्र को भी गौरवान्वित किया।

विद्यालय के प्रधानाचार्य अबरी के.बी. एवं प्रबंध निदेशक तुषार नंद जी ने विजेताओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं बच्चों में आत्मविश्वास, अनुशासन और शारीरिक स्फूर्ति को बढ़ावा देती हैं।

विद्यालय प्रबंधन ने यह भी आश्वस्त किया कि भविष्य में भी छात्र ऐसे आयोजनों में भाग लेकर और बेहतर प्रदर्शन करेंगे।

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बलिया की राजनीति में हलचल: भानु दुबे जल्द कर सकते हैं सपा जॉइन, अटकलों का बाजार गर्म

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बलिया।
बलिया के प्रमुख सामाजिक नेता भानु दुबे जल्द ही समाजवादी पार्टी (सपा) जॉइन कर सकते हैं। हाल ही में उनके सोशल मीडिया पोस्ट और गतिविधियों से इस बात के कयास तेज हो गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से भानु दुबे लगातार सपा के बड़े नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। उनकी इन मुलाकातों और नेताओं के काफिलों में देखे जाने के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है कि वे जल्द ही सपा का दामन थाम सकते हैं।

भानु दुबे को ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा माना जाता है। सामाजिक स्तर पर उनकी लोकप्रियता भी युवाओं में काफी मजबूत है। अगर वे सपा में शामिल होते हैं तो न केवल बलिया में पार्टी को मजबूती मिलेगी, बल्कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में बलिया सदर सीट से उनकी दावेदारी भी बेहद मजबूत मानी जा रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भानु दुबे के सपा में आने से बलिया की राजनीति में नया समीकरण बन सकता है।  और यह फैसला पूरे जिले के राजनीतिक परिदृश्य को बदल सकता है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि भानु दुबे कब और किस मंच से सपा की सदस्यता ग्रहण करते हैं और इसके बाद जिले की राजनीति कौन सा नया मोड़ लेती है।

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