बलिया स्पेशल
बलिया के स्कूल का हाल बद’हाल, PM का नाम पता नहीं
बलिया के बेल्थरा रोड में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय का हाल आप अगर देखे लेंगे तो खुद से ही एक सवाल पूछने लगेंगे कि ऐसे पढ़ेगा और बढ़ेगा देश. दरअसल यहाँ की पढ़ाई और व्यवस्था का इंतजाम देखने के लिए जिलाधिकारी जब शुक्रवार को सीडीपीओ टीम के साथ पहुंचे तो स्कूल में अफरा तफरी मच गई. संयुक्त टीम की जांच में स्कूल में भारी अनियमितता पाई गई है और स्कूल की पढ़ाई कुछ इस तरह से चल रही हैं कि यहाँ के बच्चों को अपने देश के प्रधानमंत्री का नाम तक नहीं पता है.
आपको बता दें आदर्श विद्यालय बनाने को लेकर चल रहे कार्यक्रम के तहत डीएम भवानी सिंह, खण्ड विकास अधिकारी सीयर विनय कुमार और सीडीपीओ सरस्वती शाक्य द्वारा एक संयुक्त टीम बनाकर स्कूल की जांच की गयी. इस दौरान स्कूल की पोल खुलने में ज्यादा वक़्त नहीं लगा. एक तो जितने बच्चों का नाम रजिस्टर में दर्ज था उससे कम तादाद में स्कूल में बच्चे मौजूद थे.
दरअसल स्कूल में खाने का इंतज़ाम बच्चों की रजिस्टर्ड नाम के आधार पर तय किया जाता है लेकिन स्कूल में उतने बच्चे नदारद रहे जिसके बाद बीडीओ ने स्कूल वार्डेन की खूब क्लास लगाई. वहीँ स्कूल में स्वच्छता अभियान की भी हकीक़त सामने आई जब टीम ने कैम्पस में गन्दगी का अम्बार देखा. क्लास के दरवाज़े और खिड़की टूटे मिले. वहीँ क्लास के ब्लैक बोर्ड पर जो शब्द लिखे थे वह भी गलत थे. सवाल करने पर छात्राएं पीएम का नाम भी नहीं बता पाई.
पहाड़ा सुनाने को कहा गया तो वह भी नहीं हो पाया. भण्डार में तय मानक के अनुरूप राशन नहीं था. गैस चूल्हा किचन के बजाय आवासीय कक्ष में पाया गया. ऐसे में आप अंदाज़ा लगा सकते है कि यहाँ की बच्चियों के भविष्य के साथ किस तरह का खिलवाड़ किया जा रहा है. ऐसे तो बेटियों को आगे बढ़ाने का सपना सपना ही बनकर रह जाएगा.
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प्रयागराज वकील हत्याकांड: बलिया के इस ब्लॉक प्रमुख पर 5 हज़ार का इनाम, पुलिस तलाश में जुटीं
प्रयागराज में चर्चित वकील अखिलेश शुक्ला हत्याकांड का मुख्य आरोपी बलिया निवासी अतुल प्रताप सिंह पर 5 हज़ार का इनाम घोषित किया गया है। आरोपी बीजेपी गड़वार ब्लॉक प्रमुख है और उसके ऊपर कई संगीन मुकदमे दर्ज हैं। इस मामले में बसंतपुर निवासी दुर्गेश सिंह और रामपुर निवासी प्रिंस सिंह पहले ही हाज़िर हो चुके हैं। इस मामले में ड्राइवर बसंतपुर निवासी अजय यादव अभी फरार चल रहा है।
जानकारी के मुताबिक, 17 नवंबर की रात सलोरी इलाके में विवाद के बाद अधिवक्ता को लाठी-डंडे, असलहे की बट और फायरिंग कर अधमरा कर दिया गया था। 20 नवंबर को अधिवक्ता की इलाज के दौरान लखनऊ में मौत हो गई थी। इस मामले में निखिल नामजद था जबकि चार अज्ञात आरोपी बनाए गए थे। मामले में 3 आरोपी निखिल सिंह, प्रिंस सिंह और मनोज सिंह पहले ही भेजे जा चुके हैं। पुलिस ने चौथे आरोपी को भी चिन्हित कर लिया था। वह छात्रनेता भी रह चुका है और मौजूदा समय में ठेकेदारी करता है।
अब पुलिस ने मुख्य आरोपी अतुल प्रताप सिंह पुत्र राणा प्रताप सिंह निवासी पचखोरा थाना गढ़वार जनपद बलिया और उसके चालक अजय यादव निवासी बसंतपुर सुखपुरा बलिया 5-5 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। साथ ही इन आरोपियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया है। इन दोनों की तलाश में पुलिस की तीन टीमें छापेमारी कर रही हैं।
प्रयागराज की शिवकुटी पुलिस ने वकील हत्याकांड में चार आरोपियों निखिल कान्त सिंह निवासी नरियांव थाना जहाँगीरगंज जनपद अम्बेडकर नगर, प्रिन्स सिंह उर्फ रणविजय सिंह निवासी रामपुर उदयभान थाना कोतवाली जनपद बलिया, मनोज सिंह निवासी टीलापुर पोस्ट जमधरवा थाना रेवती जिला बलिया और दुर्गेश कुमार सिंह निवासी ग्राम बसन्तपुर थाना सुखपुरा जनपद बलिया को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
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जानिए कौन हैं बलिया के नए एसपी विक्रांत वीर ?
बलिया पुलिस अधीक्षक पर गाज गिरने के बाद योगी सरकार ने पीएसी की 32वीं वाहिनी में तैनात विक्रांत वीर को बलिया का नया पुलिस अधीक्षक बनाया है। बता दें कि बिहार-बलिया बॉर्डर के नरही थाना क्षेत्र में ट्रकों से अवैध वसूली में संलिप्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ बलिया में बड़ी कार्रवाई हुई थी। एडीजी वाराणसी और डीआईजी आजमगढ़ की संयुक्त टीमों ने छापामार कर बलिया के थाना नरही अंतर्गत भरौली तिराहा पर अवैध वसूली के संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया ।
मामले में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता उजागर हुई है। तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित थानाध्यक्ष नरही और चौकी प्रभारी कोरंटाडीह सहित तीन उपनिरीक्षक, तीन मुख्य आरक्षी, 10 आरक्षी और एक आरक्षी चालक को निलंबित किया गया है। वहीं देर रात बलिया एसपी को भी हटा कर विक्रांत वीर को बलिया की कमान सौंपी गई है। आईये जानते हैं
कौन हैं IPS विक्रांत वीर ?
विक्रांत वीर 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वह मूल रूप से बिहार में नालंदा के रहने वाले हैं। आईपीएस बनने से पहले वह मर्चेंट नेवी में थे। विक्रांत वीर के पिता बिहार में मलेरिया इंसपेक्टर के पद पर रह चुके हैं।
1997 में झारखंड के पलामू से इंटर की परीक्षा पास करने के बाद वह मुंबई की मरीन इंजीनियरिंग कॉलेज से बीएससी करने चले गए। साल 2011 में उनका चयन मर्चेंट नेवी में हो गया।
नौकरी करते हुए वह यूपीएससी की तैयारी भी कर रहे थे। आखिरकार साल 2014 में उनका सेलेक्शन आईपीएस के लिए हो गया। उनकी पहली तैनाती कानपुर में बतौर एएसपी हुई।
कानपुर से विक्रांत वीर फैजाबाद और बलिया के एसएसपी भी रहे। उसके बाद वह लखनऊ ग्रामीण के एसपी बने। बतौर एसपी हाथरस विक्रांत वीर का पहला जिला था।
हालांकि हाथरस में लड़की के साथ घटे जघन्य अपराध के बाद विक्रांत वीर को सस्पेंड कर दिया गया है। इस मामले ने पूरे देश में तूल तब पकड़ा जब पीड़िता की मौत के बाद पुलिसवालों ने उसकी लाश देर रात खुद ही जला दी।
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