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पंचायत चुनाव- बैरिया के ये मतदान केंद्र अतिसंवेदनशील प्लस की सूची में शामिल

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बैरिया डेस्क : पंचायत चुनाव के मद्देनज़र प्रसाशन की तैयारी युद्ध स्तर पर जारी है। मतदान केंद्र एवं बूथों की संख्या को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसी के साथ ही पिछले चुनाव में हुए तनाव व छिटपुट घटनाओं के आधार पर निर्वाचन कार्यालय की ओर से संवदेनशील, अतिसंवेदनशील एवं अतिसंवेदनशील प्लस केंद्रों की प्राथमिक सूची भी तैयार की गई है। बैरिया विकास खंड अंतर्गत कुल 30 ग्राम पंचायतों के 62 मतदान केंद्रों के 206 बूथों पर एक लाख 32 हजार 797 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। रेवती थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत  दुर्जनपुर में बीते 15 अक्तूबर को हुई गोली कांड के बाद शासन-प्रशासन की नजर इस ग्राम पंचायत पर है।

मतदान केंद्र जूनियर हाईस्कूल दुर्जनपुर के छह बूथों को अतिसंवेदनशील प्लस और इसी ग्राम पंचायत अंतर्गत बैरिया थाना क्षेत्र के मतदान केंद्र प्राथमिक पाठशाला हनुमानगंज के दो बूथों को भी अतिसंवेदनशील प्लस बनाया गया है। इसके अलावा, मतदान केंद्र श्रीनगर नंबर एक के छह बूथ, मतदान केंद्र जूनियर हाईस्कूल बालिका विद्यालय बलिहार, मतदान केंद्र जूनियर हाईस्कूल रानीगंज बाजार के पांच बूथ, मतदान केंद्र प्राथमिक पाठशाला भुवालछपरा नौरंगा के दो बूथ, प्राथमिक पाठशाला चक्की नौरंगा भगवानपुर के एक बूथ, जूनियर हाईस्कूल नौरंगा के सात बूथ को अति संवेदनशील प्लस बनाया गया है।

श्रीकांतपुर ग्राम पंचायत अंतर्गत हाईस्कूल के चार बूथ, प्राथमिक पाठशाला शिवरहिया व प्राथमिक पाठशाला दुखहरनगिरी के मठिया, प्राथमिक पाठशाला सबलपुर के एक बूथ, लार्डकृष्ण एकेडमी केहरपुर के चार बूथ, प्राथमिक पाठशाला बैजनाथपुर के तीन बूथ, पंचायत भवन भुवालछपरा के तीन बूथ, प्राथमिक पाठशाला दलपतपुर के तीन बूथ को अतिसंवेदनशील बनाया गया है। इसी तरह प्राथमिक पाठशाला अधिसिझुआ, गुमानी के डेरा, प्राइमरी पाठशाला मानगढ़, प्राइमरी पाठशाला नंबर दो, पंचायत भवन मानगढ़, शिवाल के दो बूथ, प्राइमरी पाठशाला नौकागांव पश्चिमी, प्राइमरी पाठशाला शिवचक, प्राइमरी पाठशाला श्रीनगर नईबस्ती, श्रीनगर नंबर दो, प्राइमरी पाठशाला तालिबपुर, जूनियर हाईस्कूल जवाहर टोला, कन्या जूनियर हाईस्कूल करमानपुर, प्राइमरी पाठशाला सुघरछपरा, प्राइमरी पाठशाला

भीखाछपरा, प्राइमरी पाठशाला उपाध्यायपुर, पंचायत भवन कोटवां, प्राइमरी पाठशाला रानीगंज बाजार, प्राइमरी पाठशाला बैजनाथ छपरा, प्राइमरी पाठशाला मधुबनी, कन्या प्राइमरी पाठशाला मधुबनी मठिया, डॉ भीमराव अंबेडकर जूनियर हाईस्कूल, प्राइमरी पाठशाला विशुनपुरा, प्राइमरी पाठशाला चाईछपरा, प्राइमरी पाठशाला गंगापुर, जूनियर हाईस्कूल हेमंतपुर, प्राइमरी पाठशाला जमालपुर, प्राइमरी पाठशाला

चकिया, प्राइमरी पाठशाला चकिया बालपर, कन्या प्राथमिक पाठशाला चकिया, प्राइमरी पाठशाला चकगिरधर, प्राइमरी पाठशाला गोविंदपुर, प्राइमरी पाठशाला चरजपुरा, प्राइमरी पाठशाला टेंगरही, प्राइमरी पाठशाला चांदपुर, जूनियर हाईस्कूल चांदपुर, प्राइमरी पाठशाला दयाछपरा नंबर एक और नंबर दो, जूनियर हाईस्कूल दयाछपरा, जूनियर हाईस्कूल बुधनचक, प्राइमरी पाठशाला पांडेयपुर, रामपुरमिश्र, जूनियर हाईस्कूल पांडेयपुर, संपूर्णानंद इंटर कॉलेज दुबेछपरा और प्राथमिक पाठशाला प्रसाद छपरा को संवेदनशील बनाया गया है।

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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न

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26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।

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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र

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बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।

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