बलिया थाना परिसर में करीब 4 दशक पहले बने एक कमरे को अब खोला गया। तत्कालीन थानाध्यक्ष द्वारा स्वयं के बैठने के लिए यह गुंबद नुमा हवादार कमरा बनावाया था। लेकिन जानकार कहते हैं कि कमरे में बैठने के दूसरे दिन ही थानाध्यक्ष सस्पेंड हो गए तब से कोई पुलिसकर्मी उस कमरे में बैठने की हिम्मत नहीं जुटा सका। तरह तरह की बातें उस कमरे के बारे में होने लगी। पुलिसकर्मी उस कमरे को खोलने से खौफ खाते थे लेकिन हल्दी थानाध्यक्ष ने सभी अफवाहों से दूर हटकर पुलिस अधीक्षक से अनुमति लेकर उस कमरे को तोड़वा दिया।
कमरे से जुड़ी थी रहस्यमयी अफवाहें- इस कमरे को निर्माण 1981 में पूरा हुआ था। तत्कालीन थानाध्यक्ष ने उसे स्वयं बैठने के लिए बनवाया था लेकिन जब वह सस्पेंड हुए उसके बाद से ही कमरा बंद रखा जाने लगा। पुलिसकर्मियों में भी उस कमरे को लेकर भय का माहौल था। कार्यालय के सामने व हवादार होने के बावजूद कोई उसमें जाता नहीं था। कोई इसे भूतिया बताता औऱ कोई वहां जिन होने का दावा करता था।
लेकिन घटना के बाद भी पुलिसकर्मियों में डर का माहौल बढ़ता जा रहा था। तरह तरह ही अफवाहें सुनने में आ रही थी। लेकिन थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने उस गुंबद नुमा कमरा को जेसीबी मशीन से तुड़वा दिया। थानाध्यक्ष आर.के. सिंह ने बताया कि पुलिस अधीक्षक से अनुमति प्राप्त कर गुंबज को ध्वस्त करा दिया गया। खंडहर हो चुके गुंबदनुमा कमरे से थाना परिसर का प्रशासनिक भवन पूरी तरह से ढक गया था। जिससे सड़क से थाना कार्यालय दिखाई नहीं देता था।
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