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बलिया में पुलिस पर हमला, दो पक्षों के बीच झगड़ा सुलझाने गए थे जवान

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बलिया में दो लोगों के विवाद को सुलझाने गए पुलिस पर लोगों ने हमला कर दिया। बदमाशों ने दो पुलिस वालों को लाठी-डंडों से पीट दिया। दोनों घायलों का उपचार अस्पताल में कराया गया।

जानकारी के मुताबिक घटना खरुआव गांव की है। जहां दो कांस्टेबल होली के दिन शांति व्यवस्था की ड्यूटी में गए थे। इस दौरान गांव में दो लोग आपस में लड़ने लगे। जब पुलिस समझाने गई तो एक पक्ष भाग गया, लेकिन दूसरे पक्ष का प्रदीप राजभर निवासी खरुआव पुलिस के जवानों से भिड़ गया।

इस दौरान शोर होने लगा, जहां दर्जनों लोग पहुंच गए और पुलिस पर लाठी-डंडे, ईंट-पत्थर से हमला कर दिया। इसमें दोनों जवान जख्मी हो गए। उनका पीएचसी नगरा में उपचार कराया गया। इस मामले में पुलिस ने कांस्टेबल संजय कुमार सिंह की तहरीर पर  सात नामजद और कुछ अज्ञात के विरुद्ध कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसओ बृजेश सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज करने के बाद तीन को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। शेष की तलाश जारी है।

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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र

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बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।

जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।

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