बलिया
बलिया के 47 गांवों में स्थापित होंगे प्लास्टिक बैंक
बलियाः वर्तमान समय में प्लास्टिक का कचरा एक बड़ी समस्या बन गया है। इससे निपटने के लिए सरकार ने गांवों में प्लास्टिक बैंक स्थापित करने का फैसला लिया है। इन बैंकों में प्लास्टिक का कूड़ा कचरा एकत्रित किया जाएगा और बाद में एकत्रित प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग की जाएगी।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत उठाए जा रहे इस कदम के तहत पहले चरण में बलिया के 47 गांवों में प्लास्टिक बैंक स्थापित किए जाएंगे। प्लास्टिक बैंक को लेकर पंचायती राज विभाग ने रूपरेखा तैयार करनी शुरू कर दी है। डीपीआरओ ने बताया कि यह कार्य चरणवार तरीके होने हैं। पहले चरण में जिले के 47 गांवों का चयन किया गया है। वर्तमान में 19 गांवों की कार्ययोजना मंडल कार्यालय को भेजी गई है और शेष 28 गांवों की कार्ययोजना बन रही है।
जिन गांवों में प्लास्टिक बैंक बनाए जाएंगे उसमें मुरलीछपरा ब्लॉक के इब्राहिमाबाद उपरवार व कोड़हरा नौबरार, बेरूआरबारी के सुखपुरा व वांसेराम, बैरिया के कोटवां, बेलहरी के हल्दी व बेलहरी, दुबहड़ के अखार, नगवा, घोड़हरा व जनाड़ी, सीयर के तुर्तीपार व फरसाटार तथा चिलकहर ब्लॉक के सिकरिया कला, गगरेजपुर, कुरेजी, अम्तहापुर, हसनपुर व पाह कुरेजी शामिल हैं।
बताया कि प्लास्टिक कचरे को रिसाइक्लिंग करने के लिए भी संयत्र लगाए जाएंगे। डीपीआरओ यतेंद्र सिंह ने बताया कि पहले चरण जिले के कुल 47 गांवों में प्लास्टिक बैंक लगाने की तैयारी है। 19 गांवों की कार्ययोजना मंडल को भेजी गई है और शेष 28 गांवों की कार्ययोजना तैयारी की जा रही है। शासन से हरी झंडी मिलने के कारण कार्ययोजना धरातल पर उतरेगी।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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