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पारले जी बिस्कुट पर बनी यह छोटी सी क्यूट बच्ची आज दिखती है ऐसी, देखकर हैरान रह जायेंगे आप
रोज़मर्रा की खाने पीने वाली चीज़ों में बिस्कुट का अहम्पा मकाम है इसे हम नाश्ते वगैरह में इस्तेमाल करते हैं और इनमे सबसे मशहूर जो बिस्किट है वो है पारले जी जी हाँ आज हम आपको को पारले जी बिस्किट के बारे में कुछ अहम जानकारी देंगे पारले जी parle-g एक ऐसा बिस्कुट है जिसके बिना कई घरों में तो सुबह ही नहीं होती दोस्तों हमने और आपने अपने बचपन में खूब पारले जी खाया है . दोस्तों पारले जी के बारे में बहुत सी ऐसी बातें हैं जो हम नहीं जानते हैं आपको बता दें parle-g एक भारतीय कंपनी है जिसकी शुरुआत अंग्रेजों के जमाने में ही हो गयी थी .
दोस्तों 1931 में ही एक चौहान परिवार ने पारले जी कंपनी की शुरुआत कर दो . उस वक्त यह कंपनी केक एंड कुकीज बनाती थी लेकिन बाजार में अमेरिकी कंपनी के बिस्किट की बिक्री पर एक पारले जी ने भी यह तय किया कि हम भी बिस्किट बनाएंगे और 1939 में पारले जी बिस्किट बना . दोस्तों पारले जी बिस्किट के पैकेट पर आपने एक छोटी सी क्यूट सी बच्ची देखा होगा .

आज हम आपको बताएंगे यह छोटी सी क्यू सी बच्ची कौन है और कहां है . दोस्तों की छोटी सी बच्ची का नाम नीरू देशपांडे है . जोगी नागपुर की रहने वाली दोस्तों नीरू देशपांडे जब 4 साल की थी तो उनके पिता जी ने यह फोटो खींची थी और पारले जी को भेजा था . नीरू देशपांडे आज 65 साल की हो चुकी है दोस्तों इतिहास में ऐसा एक ही वाकया है जो किसी ब्रांड पर किसी की फोटो लगभग 60, 62 साल तक लगी हो .

मशहूर पारले जी बिस्किट जब से बना और अब तक इसी क्यूट सी बच्ची की फोटो इस्तेमाल की गई जिनका नाम नीरू देशपांडे है जो कि अब 65 साल की हो चुकी है .वैसे तो बाजार में बहुत से बिस्किट आये और चले गए लेकिन पारले जी ने जो नाम कमाया वह किसी ने नहीं कमाया 1939 से लेकर आज भी पारले जी बिस्किट लोगों के दिलों पर राज करता है और लोगों की सुबह बिना इस बिस्किट के नहीं होती है.
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जमुना राम मेमोरियल स्कूल में कक्षा 12वीं का भव्य विदाई समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच छात्रों को मिली नई उड़ान की प्रेरणा
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जमुना राम महाविद्यालय पहुचें बलिया एसपी ने छात्राओं को दी सुरक्षा की जानकारी
बलिया। जमुना राम स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चितबड़ागांव में बुधवार 15 अक्टूबर को मिशन शक्ति पंचम चरण के तहत नारी सुरक्षा, नारी सम्मान व नारी स्वावलंबन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक डॉ. ओमवीर सिंह रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। संस्थापक प्रबंधक प्रो. धर्मात्मा नंद, प्रबंध निदेशक ई. तुषार नंद और प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र और बुके देकर स्वागत किया।
एसपी डॉ. ओमवीर सिंह ने छात्राओं को आत्मरक्षा, साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और हेल्पलाइन नंबर 112, 108, 1098, 181, 102, 1090, 1930 और 1076 की जानकारी दी तथा उन्हें अपने जीवन में आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने की तथा संचालन श्री बृजेश गुप्ता ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
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माता-पिता की बीमारी से मौत, डीएम पहुंचे बच्चे!
बलिया। नगर के रामपुर महावल निवासी दो मासूम भाई-बहन ऋषभ सिंह (6) और रितिका सिंह (5) सोमवार को अपने नाना राधेश्याम खरवार के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और मदद की गुहार लगाई। दोनों बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता की मौत बीमारी से हो चुकी है और अब उनके रिश्तेदारों ने घर और आभूषणों पर कब्जा कर लिया है।
नाना राधेश्याम खरवार, जो पनिचा गांव के निवासी हैं, ने जिलाधिकारी से फरियाद करते हुए कहा कि उनकी बेटी सपना की दो वर्ष पूर्व बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद दामाद रोशन सिंह को पड़ोसियों ने इतना प्रताड़ित किया कि वह भी एक वर्ष पहले बीमारी के चलते चल बसे।
राधेश्याम ने बताया कि उनकी बेटी और दामाद के आभूषण बच्चों की बड़ी मां और बड़े पिता ने अपने पास रख लिए हैं और घर में ताला लगा दिया है। उन्होंने इस संबंध में जिले के कई अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि मुख्यमंत्री बाल संरक्षण योजना और बाल सेवायोजन योजना के तहत बच्चों को सहायता दी जाए, ताकि उनका पालन-पोषण और शिक्षा सुचारु रूप से हो सके।





