आज हम आपको अपने बलिया से जुड़ी एक और ख़ास बताने जा रहे हैं. दरअसल यूँ तो पशु मेला देश के कई शहरों में लगता होगा लेकिन बलिया का सोनाडीह मेला अपने तरह का देश का ऐसा पहला मेला है जहाँ पर सिर्फ गधे और खच्चरों की खरीद फरोख्त की जाती है. आपको जानकार हैरानी होगी कि यहाँ पर मिलने वाले गधे और खच्चरों की कीमत लाखों में होती है और न सिर्फ देश के अलग अलग हिस्सों से बल्कि नेपाल से भी यहाँ लोग इसे खरीदने के लिए आते हैं.
दरअसल इस मेले की शुरुआत 1985 में इलाके के धोबी समाज के लोगों ने की थी और तब से यह मेला लगातार लगता आ रहा है और आज यह इतना मशहूर हो गया है कि दूर दूर के इलाकों से बलिया महज़ गधे और खच्चरों की खरीददारी करने के लिए आते हैं. इन दिनों बिल्थरारोड के सोनाडीह में मेला लगा हुआ है. वहीँ इस देश का इस तरह का सबसे बड़ा मेला भी कहते हैं. दिलचस्प बात यह है कि देश का दूसरा सबसे बड़ा पशु मेला ददरी भी यहीं पर लगता है.
पितृपक्ष में तीन दिनों तक लगने वाले इस मेले का सारा ज़िम्मा मेले के आयोजक करते हैं. प्रशासन का इसमें कोई रोल नहीं होता है. हालाँकि गधे बेचने और खरीदने वालों से स्थानीय स्तर पर सुविधा शुल्क वसूला जाता है. चूँकि इसमें देश के सभी इलाकों से लोग आते हैं, इसलिए यहाँ पर उनके ठहरने की भी व्यवस्था की जाती है.
बताया जा रहा है कि आज कल मेले में करीब एक हज़ार की तादाद में गधे और खच्चर बिक्री के लिए आ चुके हैं और उन्हें खरीदने वालों की भी भीड़ बढती जा रही है.
बताया जाता है कि यहाँ पर एक गधा तीस हज़ार से लेकर एक लाख रूपये तक बिक जाता है. दरअसल गधे की कीमत उसके साइज़ पर निर्भर करती हैं.
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