बलिया
बलिया में बनेगी नई जेल, निर्माण के लिए 60 एकड़ भूमि की तलाश जारी
बलिया जिला कारागार की क्षमता बढ़ाई जा रही है। 1917 में स्थापित जिला जेल में कैदियों की रखने की क्षमता कम है। जिसको देखते हुए अब दूसरी जगह भवन निर्माण कराने का प्रयास हो रहा है। हालांकि अभी जमीन नहीं मिल पाई है।
शहर के बार करीब 339 कैदियों के रखने की क्षमता वाले जेल का निर्माण हुआ था। लेकिन समय के साथ कम क्षमता वाले जेल में क्षमता से दोगुना कैदी बंद होने लगे। इसके कारण कई तरह की परेशानियां पैदा हुईं। शौचालय, पानी, खाना, तमाम तरह की परेशानियों के सामना बंदियों व जेल प्रशासन के अधिकारियों को करना पड़ता है। इसके लेकर जेल प्रशासन ने शासन को पत्र लिखकर नए जेल के निर्माण की मंजूरी देने की मांग की। जिसके बाद शासन ने नई जेल निर्माण को स्वीकृति दे दी है।
नए जेल में करीब 2 हजार कैदियों की क्षमता होगी। साथ ही इसके निर्माण में हाईटेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इस नए जेल के निर्माण 60 एकड़ जमीन पर होगा। इसके लिए शहर से 10 किमी परिधि में भूमि की तलाश है। नए जेल के लिए जमीन की व्यवस्था की जा रही है। पहले सुखपुरा के बसंतपुर में जमीना खोजी गई लेकिन वहां नहीं मिली। इसके बाद सुखपुरा के करनई में भूमि की खोजबीन हुई लेकिन यहां से भी सफलता नहीं मिली। गड़वार के नरायणपाली गांव में जगह की खोज होने लगी। काफी हद तक जमीन मिल चुकी है। बाकि शेष के लिए किसानों से बातचीत हो रही है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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