पूर्व मंत्री नारद राय फिर से अपने पुराने घर समाजवादी पार्टी में लौट आए हैं। आधिकारिक या सार्वजनिक रूप से कहीं इसकी घोषणा फिलहाल भले न हुई हो लेकिन उनकी गाड़ी पर पार्टी के झंडे ने गुरुवार को ही इसकी चर्चा तेज कर दी थी। बिल्थरारोड में पूर्व मंत्री स्व. शारदानंद अंचल के जन्मदिन कार्यक्रम में सपा नेताओं के साथ उनकी मौजूदगी ने इसे और बल दे दिया। शनिवार को तो उनके चंद्रशेखरनगर स्थित आवास पर बकायदा एक बैठक भी हुई, जिसमें आगे की रणनीति तैयार करने के साथ ही सपा की मजबूती को लेकर चर्चा हुई। 26 जुलाई को जयप्रकाश नगर से शुरू होने सपा की साइकिल समग्र यात्रा की सफलता के बावत विचार-विमर्श भी किया गया।
विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सपा नेतृत्व में छिड़ी रार ने पूर्व मंत्री नारद राय को भी अपने लपेटे में ले लिया था। उस समय नारद राय सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव व शिवपाल यादव के साथ खड़़े दिखे थे। बाद में पार्टी की कमान अखिलेश यादव को मिली तो नारद राय की स्थिति कमजोर पड़ी। नगर विधानसभा की उनकी सीट से सपा ने प्रत्याशी नहीं बनाया तथा पार्टी में काफी हद तक उपेक्षा महसूस हुई तो नारद राय ने बसपा का दामन थाम लिया। बसपा के टिकट पर चुनाव भी लड़े लेकिन सफलता नहीं मिली।
नारद राय सपा को छोड़कर बसपा में भले ही चले गए लेकिन वे वहां कभी खुद को सहज महसूस नहीं कर सके थे। शायद यही वजह रही कि बहुत जल्द ही उन्होंने बसपा को अलविदा कह दिया। इसके बाद से उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया। हालांकि माना जा रहा था कि देर-सबेर अपने ‘घर’ वापस लौट आएंगे। शीर्ष स्तर पर बातचीत भी लगातार जारी रही। पार्टी सूत्रों की मानें तो मुलायम सिंह यादव के साथ नारद राय के रिश्ते बेहद खास रहे। लिहाजा वे इन्हें पार्टी में वापस लेने को लेकर हमेशा उत्सुक रहे, बस अखिलेश यादव की हरी झंडी मिलने का इंतजार था। बताया जाता है कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से वार्ता के बाद अंतत: नारद राय फिर से सपाई बन गए हैं। शनिवार को उनके आवास पर उनके समर्थकों की बैठक भी हुई। इसमें 26 जुलाई को जयप्रकाशनगर से निकलने वाली साइकिल यात्रा के 27 जुलाई को बलिया नगर विधानसभा क्षेत्र में आने पर स्वागत को लेकर रणनीति बनायी गयी।
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