बलिया
परिवहन विभाग की तैयारी, बलिया के इन 12 रुटों पर चलाई जाएंगी मिनी बस
परिवहन विभाग बलिया को बड़ी सौगात देने जा रहा है। विभाग ने जिले के 12 नए स्थानों से कई जिलों के लिए मिनी बस सेवा शुरु करने की तैयारी की है। इसके लिए ई-टेंडर किया है। बस संचालन के लिए कई कंपनियां आगे आई हैं। ऐसे में जल्द ही बसों का संचालन किया जाएगा।
जिन स्थानों से बसें गुजरेंगी उनमें एकइल, सिकरिया, दोकटी, बलिया, मनियर, बांसडीह, गढ़मलपुर, सुरेमनपुर, सिकरिया, चांदपुर और इब्राहिमपट्टी शामिल हैं। इन स्थानों से एक बस जाएगी, वहां से यात्रियों को लेकर लौटेगी। बसें रोज 2407 किलोमीटर लंबा फेरा लगाएंगी। इनसे यात्रियों को सुविधा मिलेगी, वहीं रोडवेज की आमदनी में इजाफा होगा।
इन बसों का किराया सामान्य होगा और बस सेवा का लाभ उठाने के लिए उन्हें मुख्यालय आने की जरुरत नहीं पड़ेगी। एकइल – बलिया – वाराणसी, सिकरिया-बलिया-गोरखपुर, दोकटी-बैरिया-बलिया-गोरखपुर, कोटवारी – बलिया – आजमगढ़, बलिया – रसड़ा – नगरा-गोरखपुर, मनियर-रसड़ा-वाराणसी- बलिया, बांसडीह – बलिया-वाराणसी, इब्राहिमपट्टी – बलिया – आजमगढ़, बांसडीह – बलिया-वाराणसी, इब्राहिमपट्टी – बलिया – आजमगढ़, छिब्बीखानपुरवा-गढ़मलपुर – बलिया – आजमगढ़, सुरेमनपुर – बलिया-गोरखपुर, सिकरिया-वाराणसी- बलिया- सिकरिया, चांदपुर-बलिया – देवरिया, चांदपुर – बलिया- देवरिया रुटों पर बसें चलाए जाएंगी।
ग्रामीण रुटों पर डग्गामार वाहनों से मुक्ति मिलेगी। इन रुटों पर रोडवेज की बसें नहीं चलती। ऐसे में डग्गामार वाहनों का सहारा लेने पड़ता है। जिले में 150 वाहन ही पंजीकृत हैं। इसके अलावा सब अवैध हैं। बलिया डिपोकस एआरएम राकेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि प्रस्ताव भेजा गया था, इस पर स्वीकृति मिल चुकी है। ई-टेंडर किया गया है। अगले माह से योजना का क्रियान्वयन होगा। इस महीने कंपनियों का चयन आजमगढ़ जोन की ओर से पूरा कर लिया जाएगा।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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