बलिया डेस्क : चाय बेचने वाले को आपने प्रधानमंत्री बनते तो देखा है! लेकिन क्या किसी पोस्ट ग्रेजुएट छात्रनेता को आपने चाय बेचते देखा है? नहीं देखा तो बलिया के आक़िब को देख लीजिए। दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा करने वाले आक़िब ने बलिया के गडवार रोड के पास एक चाय का कैफे खोला है। उनके कैफे का नाम ‘नेताजी टी प्वाइंट’ है।
‘नेताजी टी प्वाइंट’ क्यों – कैफे के नाम के सवाल पर उन्होंने बताया कि ये नाम बलिया की एक पुरानी चाय की दुकान के नाम पर रखा है। जो अब बंद हो चुकी है। आक़िब बताते हैं कि जिस पुरानी दुकान के नाम पर उन्होंने अपने कैफे का नाम रखा है, वहां कभी पूर्व पीएम चंद्रशेखर बैठकर चाय की चुस्की लिया करते थे।
कैफे पर आते हैं बड़े-बड़े अधिकारी और नेता – बलिया ख़बर से बातचीत के दौरान आक़िब ने बताया कि उन्होंने दिल्ली छोड़कर बलिया में इसलिए कैफे खोला है ताकि वह बलिया के लोगों की सेवा कर सकें और उन्हें मेट्रो सिटीज़ जैसे कैफे का मज़ा दे सकें। आक़िब ने अपने इस कैफे को पिछले महीने ही खोला है, लेकिन थोड़े ही दिनों में उनका कैफे पूरे ज़िले में मशहूर हो गया है।
आक़िब बताते हैं कि उनके कैफे पर नेताओं से लेकर बड़े-बड़े अधिकारी, व्यापारी, छात्र और आमजन सभी आते हैं। उनके कैफे पर कांग्रेस के ज़िलाध्यक्ष भी चाय की चुस्की ले चुके हैं। सभी को उनकी चाय बहुत पसंद आती है।
कई तरह की चाय- आक़िब के कैफे में तकरीबन आधा दर्जन किस्मों की चाय मिलती है। जिसमें नेताजी स्पेशल चाय और तंदूरी चाय सबसे ज़्यादा मशहूर हैं।
चाय के लिए किया कई शहरों का दौरा- आक़िब बताते हैं कि उन्होंने बलियावासियों को बेस्ट चाय पिलाने के लिए सूबे के कई शहरों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें जहां की चाय अच्छी लगी, उन्होंने उसे बनाने की तकनीक सीख ली और अपने मेन्यू में शामिल कर लिया। उन्होंने ये कैफे तकरीबन 11 महीनों की रिसर्च के बाद खोला है।
आक़िब की राजनीति में दिलचस्पी और कैफे खोलने तक का सफ़र– बलिया में जन्में मोहम्मद आक़िब को बचपन से ही राजनीति में गहरी दिलचस्पी रही है। ग्रेजुएशन के समय से ही वह छात्र राजनीति में काफी सक्रिया रहे हैं। बलिया से ही ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद वह दिल्ली गए और वहां की जामिया यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया।
इसके बाद वह बलिया वापस लौट आए और लॉ कॉलेज में दाखिला ले लिया। आक़िब का कहना है कि उन्होंने कैफे भी राजनीति में दिलचस्पी की वजह से खोला है। उन्होंने बताया कि पहले वाले नेताजी टी प्वाइंट पर देश के प्रधानमंत्री रहे चंद्रशेखर जैसी हस्तियां बैठकर देश की सियासत पर चर्चा किया करती थीं।
इसी से उन्हें टी कैफे खोलने का आइडिया मिला। उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि उनके कैफे पर भी सियासत से जुड़ी हस्तियां आएं और देश के मुस्तक़बिल को बेहतर बनाने की दिशा में चर्चा करें।
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