बलिया
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के नाम पर बलिया में खुले मेडिकल कॉलेजः अवलेश सिंह
बलिया में मेडिकल कॉलेज बनाए जाने की कवायद के बीच जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश सचिव अवलेश सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने जिले में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के नाम से मेडिकल कॉलेज बनाने की मांग की।
अवलेश सिंह ने शनिवार को मांग रखी कि बलिया में चंद्रशेखर जी के नाम पर मेडिकल कॉलेज की घोषणा होनी चाहिए। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री कल ज़िले में आ रहे है और चंद्रशेखर जी के नाम पर मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा कर दें तो यही सच्ची श्रृद्दांजलि होगी।
इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज न होने से जनता के सामने आ रही परेशानियों को भी उन्होंने सबके सामने रखा। उन्होंने कहा कि जिले में मेडिकल कॉलेज और उच्च स्तरीय चिकित्सा व्यवस्था न होने का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है, जिससे आए दिन गंभीर मरीजों की मौत हो रही है। सैंकड़ों मरीज इलाज कराने दूसरे जिलों के अस्पताल भाग रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब वर्ग के लोगों को होती है। ऐसे में उन्होंने जनहित में मेडिकल कालेज की स्थापना किये जाने की मांग की।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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