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कादर खान के बेटे ने रुला देने वाली बात कही है, गोविंदा को लेकर ..
दोस्तों जैसा कि आप जानते हैं कि 1 जनवरी 2019 की सुबह मशहूर डायलॉग राइटर और एक्टर कादर खान का देहांत हो गया सोशल मीडिया पर बॉलीवुड के एक्टर और आर आई पी के मैसेजेस भरे पड़े थे लेकिन दोस्तों अगर हम कादर खान की बेटी सरफराज खान की बात सुने तो दिमाग में सिनेमा इंडस्ट्री की एक अलग ही तस्वीर बनती है जो कि कादर खान की देश की खबर के बाद ज्यादा दुखी करने वाली है क्योंकि यह सिर्फ कादर खान के बारे में ही नहीं है अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए सरफराज खान ने भी हिंदी फिल्मों में काम करना शुरू किया उनके 20 साल के लंबे कैरियर में उनके खाते में सिर्फ एक ग्यारह फिल्में ही आई दोस्तों इनमें चार फिल्में ऐसी है.
जिसमें सलमान खान और उनके परिवार का कहीं ना कहीं से लिंक है सरफराज तेरे नाम और वांटेड जैसी फिल्म में काम कर चुके हैं और आखरी बार वह प्रभु देवा की फिल्म रमैया वस्तावैया में दिखाई दिए थे अपने पिता की डेथ के बाद सरफराज ने मीडिया से बात की और बातचीत में उन्होंने बताया कि जिस इंडस्ट्री को वह अपना परिवार समझते थे जिसके सामने वह खेलकूद के बड़े हुए हैं जिस को उनके पिता ने इतना कुछ दिया वहीं इंडस्ट्री उनके पिता की आखरी समय और उनकी मौत के बाद भी उनकी खोज खबर की भी वक्त नहीं निकाल सकी.

सरफराज इस मसले पर मीडिया से बात करते हुए कहते हैं कि इंडियन फिल्म इंडस्ट्री ऐसी हो गई है इसमें कई सारे कैंप बन गए हैं लोग बट गए हैं जो चीज नजर से बाहर हो जाती है वह से हम से भी बाहर हो जाती है और ऐसी मानसिकता का कुछ किया भी नहीं जा सकता मेरे पिता हमेशा हम भाइयों से कहा करते थे कि किसी से भी कोई उम्मीद मत रखना और हम इसी विश्वास के साथ बढ़े हुए की लाइफ में जो जरूरी है वह करो लेकिन उसके वापस आने की कोई उम्मीद मत रखो हालांकि दुख होता है और यह दुख सामने भी आ जाता है.

जब खादर खान के मौत के बाद कुछ लोगों को छोड़कर कोई उनके बेटों को फोन करने की जहमत नहीं उठाता है इस इंडस्ट्री में कई लोग हैं जो मेरे पापा के काफी करीबी थे और उन्हें एक आदमी ऐसा था जिसे मेरे पापा बहुत प्यार करते थे और वह बच्चन साहब है जब भी हम लोग उनसे पूछते थे कि वह फिल्म इंडस्ट्री में किसे सबसे ज्यादा मिस करते हैं तो उनका फौरन जवाब देता था कि बच्चन साहब को और मैं चाहता हूं कि बच्चन साहब जाने कि मेरे पिता उन्हें बहुत प्यार किया करते थे और अपने आखिरी समय में भी उन्हीं की बातें किया करते थे ।।आगे देखें वीडियो में।।
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जमुना राम मेमोरियल स्कूल में कक्षा 12वीं का भव्य विदाई समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच छात्रों को मिली नई उड़ान की प्रेरणा
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जमुना राम महाविद्यालय पहुचें बलिया एसपी ने छात्राओं को दी सुरक्षा की जानकारी
बलिया। जमुना राम स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चितबड़ागांव में बुधवार 15 अक्टूबर को मिशन शक्ति पंचम चरण के तहत नारी सुरक्षा, नारी सम्मान व नारी स्वावलंबन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक डॉ. ओमवीर सिंह रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। संस्थापक प्रबंधक प्रो. धर्मात्मा नंद, प्रबंध निदेशक ई. तुषार नंद और प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र और बुके देकर स्वागत किया।
एसपी डॉ. ओमवीर सिंह ने छात्राओं को आत्मरक्षा, साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और हेल्पलाइन नंबर 112, 108, 1098, 181, 102, 1090, 1930 और 1076 की जानकारी दी तथा उन्हें अपने जीवन में आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने की तथा संचालन श्री बृजेश गुप्ता ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
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माता-पिता की बीमारी से मौत, डीएम पहुंचे बच्चे!
बलिया। नगर के रामपुर महावल निवासी दो मासूम भाई-बहन ऋषभ सिंह (6) और रितिका सिंह (5) सोमवार को अपने नाना राधेश्याम खरवार के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और मदद की गुहार लगाई। दोनों बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता की मौत बीमारी से हो चुकी है और अब उनके रिश्तेदारों ने घर और आभूषणों पर कब्जा कर लिया है।
नाना राधेश्याम खरवार, जो पनिचा गांव के निवासी हैं, ने जिलाधिकारी से फरियाद करते हुए कहा कि उनकी बेटी सपना की दो वर्ष पूर्व बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद दामाद रोशन सिंह को पड़ोसियों ने इतना प्रताड़ित किया कि वह भी एक वर्ष पहले बीमारी के चलते चल बसे।
राधेश्याम ने बताया कि उनकी बेटी और दामाद के आभूषण बच्चों की बड़ी मां और बड़े पिता ने अपने पास रख लिए हैं और घर में ताला लगा दिया है। उन्होंने इस संबंध में जिले के कई अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि मुख्यमंत्री बाल संरक्षण योजना और बाल सेवायोजन योजना के तहत बच्चों को सहायता दी जाए, ताकि उनका पालन-पोषण और शिक्षा सुचारु रूप से हो सके।
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