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जब अजान होती है तो कुत्ते क्यों रोते (भोकते) है / सच्चाई जानकर चौक जाओगे
कुत्ते की यह फितरत देखकर सब हैरान रहते हैं . दोस्तों आपने भी अक्सर देखा होगा रात के समय या अजान के वक्त कुत्ते रोने और चिल्लाने लगते हैं . कुत्ते ऐसा क्यों करते हैं आज की इस पोस्ट के जरिए हम आपको बताएंगे . दोस्तों अल्लाह ने जानवरों को एक ऐसी खास ताकत दी है जो कि इंसानों को नहीं दिया जबकि अल्लाह ने इंसानों को अशरफ उल मख़लूक़ात बनाया है मतलब अल्लाह की बनाई हुई तमाम मखलूको में इंसान सबसे अच्छी मखलूक है . तब भी दोस्तों अल्लाह ने इंसानों को ऐसी ताकत नहीं दिए जिससे वह चलती फिरती बलाओं को शैतानों को और आफतो को देख सके लेकिन ऐसी कुव्वत अल्लाह ने जानवरों को दिया है .
दोस्तों जानवर जब भी ऐसी बलाओ को या शैतानों को देखते हैं तो वह बेजुबान होने की वजह से इंसानों को नहीं बता सकते हैं लेकिन वह अपने अंदाज में इंसानों को चिल्लाकर आगाह करने की कोशिश करते हैं . अगर आपने गौर किया होगा तो सबसे ज्यादा कुत्ते फ़ज़र की अजान के वक्त चिल्लाते हैं क्योंकि दोस्तों रात के वक्त शैतान ज़्यादा आते हैं और सुबह फज्र की अजान सुनते ही भागना शुरू कर देते हैं . और उनके भागने को कुत्ते अपनी खुली आंखों से देखते हैं इसलिए वह रोना और चिल्लाना शुरू करते हैं यह रोना और चिल्लाना इंसानों के लिए आगाह करने का तरीका है .

दोस्तों अक्सर आपने रात के समय देखा होगा कुत्ते रोते हैं या चिल्लाते हैं तो आपको बता दें रात के समय शैतान का आना जाना ज्यादा होता क्योंकि एक हदीस के मुताबिक अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया मगरिब के वक्त से शैतान जमीनों में फैलना शुरू हो जाते हैं .

इंसानों को ऐसी कुवर अल्लाह ताला ने नहीं दी है कि वह शैतान को खुली आंखों से देख सकते हैं लेकिन दोस्तों कुत्ते उनको देख लेते हैं और उनको देखने के बाद चिल्लाना और बोलना शुरू कर देते हैं दोस्तों आपने अक्सर गौर किया होगा जब सड़कों पर सन्नाटा हो जाता हैं यानी रात ज्यादा हो जाती है तब कुत्ते चिल्लाना शुरू करते हैं इससे पता चलता है कि सन्नाटा होते ही शैतान अपनी चहल-पहल शुरू कर देते हैं और जानवर उन्हें देखते हैं चिल्लाते और रोते हैं .

दोस्तों एक हदीस के मुताबिक अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहू अलेही वसल्लम ने फरमाया की मग़रिब के वक्त से शैतान जमीनों पर बारात की तरह उतर आते हैं चहल पहल शुरू कर देते हैं . उलेमाओ का कहना है कि मगरिब के बाद अपने बच्चों और औरतों को घर में रखा जाए ना बाहर निकलने दिया जाए ना ही छत पर जाने दिया जाए.
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जमुना राम मेमोरियल स्कूल में कक्षा 12वीं का भव्य विदाई समारोह, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच छात्रों को मिली नई उड़ान की प्रेरणा
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जमुना राम महाविद्यालय पहुचें बलिया एसपी ने छात्राओं को दी सुरक्षा की जानकारी
बलिया। जमुना राम स्नातकोत्तर महाविद्यालय, चितबड़ागांव में बुधवार 15 अक्टूबर को मिशन शक्ति पंचम चरण के तहत नारी सुरक्षा, नारी सम्मान व नारी स्वावलंबन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस अधीक्षक डॉ. ओमवीर सिंह रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। संस्थापक प्रबंधक प्रो. धर्मात्मा नंद, प्रबंध निदेशक ई. तुषार नंद और प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने मुख्य अतिथि का अंगवस्त्र और बुके देकर स्वागत किया।
एसपी डॉ. ओमवीर सिंह ने छात्राओं को आत्मरक्षा, साइबर सुरक्षा, सड़क सुरक्षा और हेल्पलाइन नंबर 112, 108, 1098, 181, 102, 1090, 1930 और 1076 की जानकारी दी तथा उन्हें अपने जीवन में आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ. अंगद प्रसाद गुप्त ने की तथा संचालन श्री बृजेश गुप्ता ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के सभी शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
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माता-पिता की बीमारी से मौत, डीएम पहुंचे बच्चे!
बलिया। नगर के रामपुर महावल निवासी दो मासूम भाई-बहन ऋषभ सिंह (6) और रितिका सिंह (5) सोमवार को अपने नाना राधेश्याम खरवार के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे और मदद की गुहार लगाई। दोनों बच्चों ने बताया कि उनके माता-पिता की मौत बीमारी से हो चुकी है और अब उनके रिश्तेदारों ने घर और आभूषणों पर कब्जा कर लिया है।
नाना राधेश्याम खरवार, जो पनिचा गांव के निवासी हैं, ने जिलाधिकारी से फरियाद करते हुए कहा कि उनकी बेटी सपना की दो वर्ष पूर्व बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद दामाद रोशन सिंह को पड़ोसियों ने इतना प्रताड़ित किया कि वह भी एक वर्ष पहले बीमारी के चलते चल बसे।
राधेश्याम ने बताया कि उनकी बेटी और दामाद के आभूषण बच्चों की बड़ी मां और बड़े पिता ने अपने पास रख लिए हैं और घर में ताला लगा दिया है। उन्होंने इस संबंध में जिले के कई अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि मुख्यमंत्री बाल संरक्षण योजना और बाल सेवायोजन योजना के तहत बच्चों को सहायता दी जाए, ताकि उनका पालन-पोषण और शिक्षा सुचारु रूप से हो सके।





