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बलिया DM पर उठे सवाल, विपक्ष पर कारवाई लेकिन सत्तारूढ़ दल के विधायक को इतनी छूट क्यों?
बलिया डेस्क : बलिया में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक ने कोविड-19 संक्रमण पर अंकुश के लिए लगे लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों को धता बताते हुए विभिन्न गांवों में स्वयं जाकर पका पकाया भोजन का वितरण कर रहे हैं.
हांलांकि शनिवार को जिलाधिकारी के इस फरमान के बाद की तमाम ऐसे संगठन , जो रोजाना गरीबों में पका-पकाया भोजन वितरण करते थे, बंद कर दें . लेकिन भाजपा के बैरिया विधायक सुरेंद्र सिंह है कि मानने को तैयार नहीं.
शासन के आदेश के क्रम में जिलाधिकारी के फरमान की अवहेलना करते हुए विधायक ने रविवार को भी क्षेत्र के विभिन्न गांवों में स्वयं जाकर पका पकाया भोजन का वितरण किया.
बेशक विधायक के इस कदम की चारो ओर प्रशंसा हो रही है, लेकिन सत्तापक्ष के विधायक होने के नाते उनके द्वारा सोशल डिस्टेंस का इस तरह उल्लंघन शासन की दोहरीनीति को उजागार कर रहा है.
वहीं जिलाधिकारी की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लग रहे है. ऐसा नहीं कि जिलाधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, विपक्ष के लोगों पर खूब करवाई हो रही है. समाजवादी पार्टी के नेता एव पूर्व मंत्री नारद राय का लंगर बंद कराने के साथ समाजसेवी और युवा चेतना प्रमुख रोहित सिंह को भी जिलाधिकारी नोटिस जारी कर चुके हैं.
लेकिन विधायक से जिलाधिकारी को खौफ कैसा है ये वो ही बता सकते हैं. वहीँ जब हमने जिलाधिकारी से बात करने की कोशिश की तो उनसे संपर्क नहीं हो सका. उधर दंभ भरते हुए विधायक के कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिलाधिकारी की क्या मजाल है जो हमारे विधायक को छेड़ दें.
लेकिन दिलचस्प बात यह है कि विधायक ख़िलाफ़ मामला दर्ज नहीं कराया गया है जबकि धारा 188 तहत उनपर मामला बनता है और यह माला तो एपिडिमेक डिजीज एक्ट, 1897 के अधीन भी आता है.
एपिडिमिके डिजीज़ एक्ट की पेनाल्टी के मुताबिक़ इस क़ानून के तहत दिए गए किसी आदेश या फिर किसी प्रावधान के उल्लंघन करने पर वह शख़्स आईपीसी धारा 188 के तहत दंडनीय होता है.
क़ानून स्पष्ट है. अगर किसी व्यक्ति को यह मालूम हो कि सरकार के आदेश का उल्लंघन करने से किसी इंसान की जान, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर ख़तरा उत्पन्न हो तो उस पर आईपीसी की धारा 188 के तहत मामला बनता है. धारा 188 के उल्लंघन करने पर किसी भी शख़्स को छह महीने या एक हज़ार रुपये के जुर्माने के साथ छह महीने की सजा हो सकती है.
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।
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BHU छात्र नेता योगेश योगी के प्रयास से एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव को मिली मंजूरी!
बलिया। फेफना जंक्शन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव को लेकर क्षेत्रवासियों की लंबे समय से चली आ रही मांग अब पूरी हो गई है। बीएचयू छात्र नेता योगेश योगी के लगातार प्रयास और पहल से रेलवे ने एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव को स्वीकृति दे दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 16 जनवरी से इन ट्रेनों का फेफना स्टेशन पर ठहराव शुरू हो जाएगा। इस उपलब्धि का श्रेय प्रदेश सरकार के आयुष मंत्री दयानंद मिश्रा ‘दयालु’ को दिया जा रहा है,
छात्र नेता योगेश योगी ने यात्रियों, छात्रों और आम नागरिकों की समस्याओं को लेकर संबंधित अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के समक्ष लगातार मांग उठाई थी। उनके प्रयासों के बाद यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया, जिससे क्षेत्र के हजारों यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
ट्रेन ठहराव से विशेष रूप से छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों और इलाज के लिए बाहर जाने वाले मरीजों को सुविधा होगी। स्थानीय लोगों ने इसे जनहित में लिया गया निर्णय बताते हुए योगेश योगी के प्रति आभार जताया है।
योगेश योगी ने कहा कि यह केवल शुरुआत है, आगे भी क्षेत्र और छात्रों के हित में संघर्ष जारी रहेगा।
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