बलिया। जिले में शिक्षकों की कमी के बावजूद शिक्षकों की भर्ती नहीं की जा रही है। शिक्षकों की कमी से बच्चों के भविष्य पर असर पड़ रहा है। बिना शिक्षकों के छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिलों में जितने शिक्षक होना चाहिए। उतने शिक्षक नियुक्त नहीं है। जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। हालांकि देखना होगा कि कब तक शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है। जिले में 32 राजकीय विद्यालय जिसमें 110 शिक्षक हैं। 372 के सापेक्ष मात्र 110 शिक्षक कार्यरत है। जबकि अन्य शिक्षकों की नियुक्ति अभी तक नहीं हो पाई।
शिक्षकों के रिटायरमेंट के बाद अभी तक सरकार ने खाली पदों की पूर्ति नहीं की। वैसे अक्टूबर माह के पहले राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की संख्या 47 थी। नई भर्ती होने के बाद 60 शिक्षकों की भर्ती की गई। लगभग 32 राजकीय विद्यालयों में 5500 बच्चे पढ़ रहे हैं। जिले में एडेड विद्यालयों की संख्या कुल 91 है। यहां 818 शिक्षक कार्यरत है सहायक अध्यापक व प्रवक्ता मिलाकर। वित्तविहीन कालेजों की संख्या 474 है। यहां लगभग 6500 शिक्षक है। सरकार इन शिक्षकों पर करोड़ों रूपए खर्च करती है।
लॉकडाउन के चलते लगभग डेढ़ वर्ष तक विद्यालय बंद रहे और बच्चे स्कूल से दूर रहे। लॉकडाउन के दौरान हालांकि कुछ स्कूलों में ऑनलाइन क्लासेज चलते रहीं। लेकिन अधिकतर परिवार के बच्चों के पास मोबाइल की कमी देखी गई। जिसके चलते बच्चे पढ़ाई में पीछे रह गए। हालांकि अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग कब तक शिक्षकों की कमी को पूरा करने पर ध्यान देता है।
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