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Ballia- सरकार की उपेक्षा का शिकार चितबड़ागांव, करोड़ों खर्च के बाद एप्रोच मार्ग न बनने से ग्रामीण बेहाल

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किसानों की खेती और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन – चेतावनी, एक सप्ताह में समाधान न हुआ तो करेंगे आंदोलन

चितबड़ागांव (बलिया)।
टौंस नदी पर करोड़ों रुपये खर्च कर सेतु निगम द्वारा बनाया गया पुल आज भी अधूरा पड़ा है। एप्रोच मार्ग न बनने के कारण पुल का उपयोग ही नहीं हो पा रहा। नतीजतन बहादुरपुर, गोपवां, जगदीशपुर, चिलकहर, औदी, पियरिया समेत दर्जनों गांवों के लोगों का चितबड़ागांव नगर से सीधा सम्पर्क पूरी तरह से टूट चुका है।

किसानों व छात्रों की बढ़ी मुश्किलें

ग्रामीणों का कहना है कि एप्रोच मार्ग न होने से उन्हें अपने ही नगर तक पहुंचने के लिए 20 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाकर फेफना या मटिही होकर आना-जाना पड़ता है। किसान अपने खेतों तक आसानी से नहीं पहुंच पा रहे। पशुओं के चारे की आपूर्ति और फसलों की देखभाल के लिए उन्हें नदी पार करने हेतु जोखिम भरी व्यवस्था करनी पड़ रही है। कई किसान बांस की सीढ़ी लगाकर नदी पार करते हैं।
इसी प्रकार, उस पार रहने वाले बच्चों की पढ़ाई भी बुरी तरह प्रभावित है। उन्हें स्कूल तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिसके चलते कई बार वे नियमित रूप से स्कूल नहीं जा पाते।

इतिहास और अधूरा वादा

जानकारी के अनुसार, दो वर्ष पूर्व तत्कालीन मंत्री उपेन्द्र तिवारी के प्रयासों से उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने पुल निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद सेतु निगम ने करोड़ों की लागत से पुल और एक तरफ का एप्रोच मार्ग बना भी दिया। लेकिन दूसरी ओर का एप्रोच मार्ग अब तक नहीं बनाया गया।
बरसात के दिनों को छोड़कर वर्षों से यहां पीपे का पुल लोगों का सहारा रहा। लेकिन पक्का पुल बनने के बावजूद उसका लाभ आज तक क्षेत्रीय जनता को नहीं मिल पाया है।

ज्ञापन सौंपा, आंदोलन की चेतावनी

लगातार हो रही उपेक्षा से आक्रोशित ग्रामीणों ने सोमवार को समाजसेवी व पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशी राजू उर्फ डब्बू सिंह के नेतृत्व में जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि एक सप्ताह के भीतर एप्रोच मार्ग का निर्माण शुरू कराया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर काम नहीं हुआ, तो वे धरना-प्रदर्शन और आमरण अनशन करने को बाध्य होंगे।

ग्रामीणों की आवाज़

स्थानीय किसानों का कहना है कि पुल बनने से उन्हें उम्मीद जगी थी कि अब उनका सफर आसान हो जाएगा और खेती-बाड़ी, शिक्षा व व्यापार में सुविधा मिलेगी। लेकिन वर्षों बाद भी अधूरी परियोजना ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द एप्रोच मार्ग पूरा कराकर उन्हें इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की है।

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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न

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26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।

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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र

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बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।

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