जमीनी हकीकत से इतर नगर पालिका का दावा है कि जिले की साफ-सफाई के लिए हर महीने पचास लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
बलिया जिले में चारों ओर कचरे का ढ़ेर लगा हुआ है। सड़क पर जहां-तहां कूड़ा फैला हुआ है। रास्ते से गुजरने वालों का आना-जाना मुश्किल हो चुका है। बारिश के बाद ये किचावन और भी बढ़ जा रही है। सड़क पर घूम रहे अवारा पशु इन कचड़ों को और भी तितर-बितर कर रहे हैं। जमीनी हकीकत से इतर नगर पालिका का दावा है कि जिले की साफ-सफाई के लिए हर महीने पचास लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं।
गौरतलब है कि लगभग हर साल नगर पालिका की ओर से जिले भर के नालों की सफाई के लिए टेंडर पास होता है। यह टेंडर बीस से पच्चीस लाख तक का होता है। लेकिन इसके बाद भी हर साल बारिश के बाद भी जिले के नाले बजबजाते हुए ही मिलते हैं। नालों के जाम होने के कारण जल निकासी की समस्या भी गंभीर रूप में सामने आती है। नाले बुरी तरह से जाम हो जाते हैं। लेकिन हफ्तों इनकी सफाई नहीं होती है। जिसके वजह से जिले के लोग मुश्किलों का सामना करने पर मजबूर हैं।
बलिया के लोगों का कहना है कि कूड़े की साफ-सफाई और नालों की सफाई के लिए जब नगर पालिका में शिकायत की जाती है तब महज आश्वासन ही मिलता है। नगर पालिका के अधिकारी लोगों को सिर्फ साफ-सफाई करवाने की बात कहते हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। लोग हफ्तों तक नाले की बदबू के बीच जीने पर मजबूर रहते हैं।
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