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बलिया में गंगा, सरयू और टोंस नदियां घटाव पर, निचले इलाकों में बाढ़ से हालात खराब

बलिया में गंगा, सरयू और टोंस नदियां घटाव पर हैं। तीनों ही नदियां का जलस्तर खतरा बिंदु के ऊपर है। उफनाई नदियों की वजह से तटवर्तीय इलाकों में बाढ़ आ गई है। बीते 19 सितंबर की रात बाढ़ के पानी के दबाव की वजह से नेशनल हाईवे 31 करीब 40 मीटर टूट गया था। इससे हालात और भी खराब हो गए थे।

दोनों नदियों के उफान पर होने के कारण करीब 3 दर्जन से अधिक गांव की लगभग 2 लाखों की आबादी प्रभावित है। गंगा का पानी शहर के निचले इलाकों में घुस गया है। दूबेछपरा इंटर कॉलेज और पीजी कॉलेज के आंगन में बाढ़ का पानी जमा है।

बाढ़ नियंत्रण कक्ष द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक गायघाट गेज पर शनिवार की सुबह 8 बजे गंगा का जलस्तर 59.65 मीटर रिकार्ड किया गया, जबकि यहां का हाई फ्लड लेबल वर्ष 2016 में 60.390 रिकार्ड किया गया था। वहीं, घाघरा का जलस्तर डीएसपी हेड पर शनिवार की सुबह 8 बजे 64.05 मीटर रिकार्ड किया गया, यहां खतरा विन्दु 64.010 मीटर है। उधर, टोंस नदी का जलस्तर पिपरा घाट 60.50 मीटर रिकार्ड किया गया, जबकि लाल निशान 60 मीटर है।

गंगा नदी की बाढ़ का पानी रेपुरा, त्रिलोकपुर मनिया, आढ़त दूबे के छपरा, हरिपुर पोखरा, दूबेछपरा, गोपालपुर, सुघरछपरा, केहरपुर समेत कई गावों में घुस गया है। वहीं, नौरंगा, भुआलछपरा, चक्की नौरंगा, जवही, ब्यासी, सोमाली परानपुर इत्यादि गावों का जनपद मुख्यालय से सीधा सम्पर्क टूट गया है। वहीं, कुछ लोग अपना खटिया-पटिया समेटकर ऊंचे स्थानों पर पहुंचाते नजर आये। ओझवलिया से रेपुरा जाने वाली सड़क पर बाढ़ का पानी आ जाने से राहगीरों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ओझवलिया में किसान अपने अपने खेतों मे पानी आ जाने के कारण मकई की फसलों को पानी में घुस कर काट रहे हैं।

बता दें कि सरयू नदी के तांडव की वजह से अब तक करीब 450 आसियाने नदी में समाहित हो चुके हैं। ग्रामवासियों का कहना है कि अभी तक किसी प्रकार की कोई प्रशासनिक सहायता नहीं पहुंचाई गई है। जिसके कारण यहां के लोगों में रहने और खाने का संकट लगातार बना हुआ है।

Rashi Srivastav

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