बलिया
आज भी अधूरा है जनेश्वर मिश्र सेतु का एप्रोच मार्ग, भारी वाहन चालक हो रहे परेशान
बलिया में शिवरामपुर घाट पर बिहार को जोड़ने के लिए गंगा पर महासेतु (जनेश्वर मिक्ष सेतु) बनाने की योजना बनाई थी लेकिन सात साल बीत जाने का बाद अब तक पुल पर भारी वाहनों का संचालन नहीं हो पाया है।
इस पुल का निर्माण पूरा हो चुका है। लेकिन बिहार की तरफ से एप्रोच का निर्माण नहीं हो पाया है। बता दें कि साल 2015 में बलिया को बिहार समेत पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने के लिए इस पुल का शिलान्यास हुआ था, पुल 3 साल में बनकर तैयार होना था लेकिन सुस्त कार्यप्रणाली के चलते इसे बनने में 7 साल लग गए लेकिन अभी भी अप्रोच निर्माण का कार्य अधूरा है।
इसके चलते पुल ने हल्के वाहन तो आ-जा रहे हैं लेकिन भारी वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद है। लिहाजा भारी वाहन चालकों को बिहार जाने के लिए 40 किलोमीटर दूर जयप्रकाश नगर स्थित जयप्रभा सेतु होकर जाना पड़ता है।
वहीं यूपी-बिहार के बीच गंगा पर बना वीर कुंवर सेतु भी क्षतिग्रस्त हो जिसके चलते यहां से भी भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित है। बलिया के लोकनिर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता देवेंद्र वर्मा का कहना है कि एप्रोच निर्माण में कुछ अड़चने थीं, जिसे सुलझा लिया गया है। अब जल्द ही निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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