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बलिया में 130 करोड़ की लागत से बदले जाएंगे जर्जर तार, सुधरेगी बिजली आपूर्ति
बलिया में रिवैंप योजना के तहत बिजली आपूर्ति की व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जाएगा। जर्जर तार बदले जाएंगे, ट्रांसफार्मरों को ठीक किया जाएगा। सरकार ने इस काम के लिए आजमगढ़ जोन के लिए करीब 500 करोड़ की स्वीकृति दी है।
बलिया में 130 करोड़ से काम होगा। पहले जर्जर तारों को बदला जाएगा। इसके लिए कार्यदायी एजेंसी भी नामित हो गई है। जिले के कई इलाके हैं जहां विद्युत उपकेंद्र को लंबी दूरी तक बिजली की आपूर्ति करनी पड़ती है। लंबी दूरी होने के कारण किसी तरह का फॉल्ट आने में अधिक समय लग जाता है।
तार की लंबाई की वजह से लाइनलॉस होता है। इसके चलते कई इलाकों में बिजली सप्लाई प्रभावित होती है। अब जिले के अलग-अलग क्षेत्रों के कुल 3291 किलोमीटर लंबाई केे एबी केबल बदले जाएंगे। इसके अलावा 33 केवी के कुल 149 किमी लंबाई के तारों को बदला जाएगा। वहीं 11 केवी के 609 किमी लंबाई के जर्जर तारों को बदला जाएगा।
बता दें कि रिवैंप योजना के तहत साल 2022-26 के लिए कार्ययोजना बनी है। इन पांच वर्षों में योजना के लिए अलग-अलग कार्य किए जाएंगे। कुल परियोजना 700 करोड़ की है। बलिया विद्युत अधीक्षण अभियंता आरके जैन का कहना है कि रिवैंप योजना में विभाग के कई बड़े कार्य प्रस्तावित हैं। पहले चरण में जर्जर तारों को बदलने की कार्ययोजना स्वीकृत हुई है। पॉवर कॉरपोरेशन की ओर से कार्यदायी संस्था नामित है। जल्द ही कार्य शुरू कराया जाएगा।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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