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MLC सदस्य बनने के बाद पहली बार बलिया आ रहे दानिश अंसारी, स्वागत की तैयारी पूरी

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बलिया। विधान परिषद सदस्य निर्वाचित होने के बाद दानिश आजाद अंसारी पहली बार बलिया आ रहे हैं। ऐसे में उनके स्वागत की भी तैयारी कर ली है। दानिश आजाद अंसारी निर्विरोध विधान परिषद सदस्य निर्वाचित हुए हैं। बता दें विधान परिषद की 13 सीटों पर चुनाव की प्रक्रिया बीते 2 जून से हुई थी। जहाँ बीजेपी ने 9 और 4 सीट पर सपा प्रत्याशी निर्वाचित हुए थे। बीजेपी से निर्वाचित प्रत्याशियों में दानिश आजाद अंसारी शामिल रहे। जिन्हें राज्यमंत्री बनाने के बाद बीजेपी ने MLC सदस्य भी है।

विधान परिषद सदस्य निर्वाचित होने के बाद पहली बार बलिया आने पर उन्हें पोस्टर के माध्यम से बधाई दी जा रही है। MLC सदस्य और राज्यमंत्री दानिश आजाद के आगमन को लेकर कार्यकर्ताओं काफ़ी उत्साह भी देखने को मिल रहे हैं। बता दें योगी सरकार में मोहसिन रजा की जगह मुस्लिम मंत्री बने दानिश आजाद अंसारी केवल मुस्लिम चेहरा नहीं, बल्कि वह उस पसमांदा यानी पिछड़े मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि हैं, जो एक अर्से से अपनी अनदेखी की आवाज प्रदेश में उठाता रहा है।

दानिश अंसारी का राजनीतिक सफर– दानिश पिछले कई सालों से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के साथ जुड़े हुए हैं। योगी सरकार बनने पर उन्हें भाषा समिति का सदस्य बनाया गया था। पिछले साल बीजेपी ने उन्हें जिम्मेदारी देते हुए भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चे का प्रदेश महामंत्री बना दिया गया था। वह लगातार अल्पसंख्यक समाज के बीच सक्रिय बने हुए थे, जिसका पुरस्कार उन्हें योगी सरकार का मंत्री बनाकर दिया गया है। और अब उन्हें विधान परिषद का सदस्य भी बनाया गया है।

दानिश की शुरुआती पढ़ाई बलिया से ही हुई। इसके बाद उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से बी. कॉम की पढ़ाई की। यहीं से पब्लिक ऐडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की पढ़ाई की। छात्र राजनीति के समय से ही दानिश एबीवीपी के साथ ऐक्टिव बने हुए थे। 2017 में बीजेपी की सरकार बनने पर दानिश को उनकी सक्रियता का इनाम दिया गया। योगी सरकार ने उन्हें 29 अक्टूबर 2018 को उर्दू भाषा आयोग का सदस्य भी मनोनीत किया था। विधानसभा चुनाव के पहले उन्हें भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का प्रदेश महामंत्री भी बनाया गया था।

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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र

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बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।

जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।

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