उत्तर प्रदेश के आबकारी विभाग पर भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में बसपा एवं सपा सरकारों के दौरान प्रदेश सरकार के 24805 करोड़ के राजस्व की क्षति का आंकलन किया है. उप्र विधानसभा में पेश की गई सीएजी की रिपोर्ट में प्रदेश की आबकारी नीति 2008-9 से 2017-18 के दौरान हुई अनियमिततओं व क्षति के बारे में बताया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन सरकारों ने विदेशी शराब एवं बियर की कीमत मनमाने ढंग से तय करने की अनुमति डिस्टलरीज और ब्रेवरीज को दे रखी थी. सीएजी ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार के द्वारा 2018-19 में घोषित नई आबकारी नीति को सराहा है.
योगी सरकार की नई आबकारी नीति के कारण आबकारी से होने वाली आय में 48 प्रतिशत की वृद्धि का भी ब्यौरा दिया गया है. नई आबकारी नीति के चलते राज्य में 18705 करोड़ रुपए का राजस्व बढ़ा है.
साल 2008 से 2018 के बीच एक्स डिस्टलरी प्राइस व एक्स ब्रेवरी प्राइस का निर्धारण शराब बनाने वाली डिस्टलरियों और बीयर बनाने वाली ब्रेवरियों के विवेक पर छोड़ दिया गया. इससे ही 7,168 करोड़ रुपये का सरकारी खजाने को चूना लगा. इसके अलावा देशी शराब में न्यूनतम गारंटी कोटा बढ़ा देते तो तीन हजार करोड़ के राजस्व नुकसान से बचा जा सकता था. सीएजी रिपोर्ट में इसकी सतर्कता से जांच कराने की संस्तुति की गई है. कहा गया है कि दोषियों की जिम्मेदारी तय की जाए.
सीएजी ने माना है कि इसमें सरकारी अधिकारियों का भ्रष्टाचार मुख्य वजह रही. रिपोर्ट में मायावती के शासनकाल में 2009 में शराब बिक्री लिए बनाए गए विशिष्ट जोन को भी गलत करार दिया गया है. यह विशिष्ट जोन उस वक्त मायावती के करीबी माने जाने वाली शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा के समूह को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया.
रिपोर्ट के अनुसार मेसर्स वेव डिस्टलरी एवं ब्रेवरीज लि.अलीगढ़ द्वारा वर्ष 2013-14 की अवधि में भारत में निर्मित अंग्रेजी शराब के तीन ब्राण्ड की 180 एम.एल. की बोतलों के अधिकतम थोक मूल्य की गलत गणना की गयी और आबकारी विभाग द्वारा भी इस त्रुटि का पता नहीं लगाया जा सका या जानबूझ कर नहीं लगाया गया.
सीएजी ने रिपोर्ट में एक्स डिस्टलरी प्राइस और एक्स ब्रेवरी प्राइस में बढ़ोतरी के कारण डिस्टलरियों को 7168.63 करोड़ रुपये के अनुचित लाभ पहुंचाए जाने के मामले में सरकार द्वारा सतर्कता जांच करने की सिफारिश भी की है।
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