बलिया स्पेशल
जमाने भर में बदनाम बिल्डर की खातिर ‘सीओ’ को ‘हड़काना’ स्वाति सिंह को बहुत सताएगा!
जमाने भर में बदनाम अंसल बिल्डर की खैर की खातिर तेज-तर्रार महिला पुलिस क्षेत्राधिकारी डॉ. बीनू सिंह को धमकाना यूपी की मंत्री स्वाति सिंह को अभी बहुत सताएगा. यह हम नहीं, बल्कि उन्हीं की दबंगई को बयान करता हुआ बाहर आया ‘ऑडियो’ का जिन्न बयान कर रहा है. राज्य सरकार के गले की फांस बनीं दबंग महिला पुलिस अफसर डॉ. बीनू सिंह मौजूदा वक्त में लखनऊ के कैंट सब-डिवीजन की सर्किल अधिकारी (सीओ) हैं,
जबकि अब से पहले भी कुछ मामलों में चर्चित रहीं स्वाति सिंह पूर्व BJP नेता दयानंद सिंह की पत्नी और खबर लिखे जाने के वक्त तक यूपी सरकार में मंत्री हैं.फिलहाल, सरकार, पार्टी और खुद की छीछालेदर होती देख राज्य के मुख्यमंत्री ने इस कथित बवाली कहिए या फिर जिन्नाती ‘ऑडियो-टेप’ कांड की जांच पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह के हवाले कर दी है. डीजीपी की इसी रिपोर्ट पर टिका है आज की दबंग मंत्री के आने वाले कल का ‘राजनीतिक-भविष्य’.

महिला सीओ और मंत्री स्वाति सिंह के बीच हुई अविश्वसनीय-सी लगने वाली कथित बातचीत के बबाली ऑडियो टेप को जो सुन रहा है, वही सन्न है. सुनने वालों की जुबान पर यही है कि “भाजपा जैसी अनुशासित पार्टी के भीतर स्वाति जैसी धमकाऊ मंत्री को आखिर जगह दी ही किसने?” कुल जमा जब से इस ऑडियो टेप का जिन्न बाहर आया है, तब से भाजपा की धुर-विरोधी पार्टियां सक्रिय हो गई हैं.
भाजपा को यह बताने के लिए कि वह जमाने भर की ठेकेदारी छोड़कर पहले अपने घर को साफ-सुथरा करके महफूज करे.इस बारे में भाजपा के पूर्व वरिष्ठ नेता और अब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आईपी सिंह ने शनिवार शाम आईएएनएस से कहा, “मैंने 30 साल की सेवा के बाद यूं ही BJP नहीं छोड़ी. दयानंद सिंह और स्वाति सिंह (पति-पत्नी) जैसों से दूर रहने के लिए ही भाजपा को गुडबाय कहा.
वरना आज की भाजपा का जो हाल है, उसमें मैं जनता के बीच आने-जाने के काबिल भी नहीं रहता.” आईपी सिंह ने आगे कहा, “इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि यूपी में भाजपा और उसके सुशासन के कथित नारे की दुर्गति कैसे अपने ही (स्वाति सिंह जैसे) कर रहे हैं. जिस सरकार की महिला मंत्री (विवादित स्वाति सिंह) अपनी ही राज्य पुलिस की किसी महिला सीओ को एक अदद बदनाम बिल्डर की खैर की खातिर खरी-खरी सुना रही हो,
सोचिए वहां अब होने को भला बाकी क्या रहा होगा? यह तो भला हो ऑडियो रिकार्डिग करके उसे सर-ए-आम ला देने वाले का. अब यह भाजपा सोचे कि यूपी चुनाव में ‘बेटी के सम्मान में भाजपा मैदान में’ जैसा मनभावन नारा बेचने वाली भाजपा को उसी की महिला मंत्री ने किस कदर समाज की नजरों में नीचा कर डाला है?.”ऑडियो टेप की आफत में चारों ओर से घिरी स्वाति सिंह फिलहाल शायद सामने आने को राजी नहीं हैं.

पूरे बवाल पर आईएएनएस ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी. फिलहाल एक बदनाम बिल्डर की कथित खैरियत की खातिर बैठे-बैठाए खड़ी हुई इस मुसीबत से पीछा छुड़ाने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच राज्य के पुलिस महानिदेशक के हवाले कर दी है.पुलिस महानिदेशक की जांच रिपोर्ट तय करेगी स्वाति सिंह का भविष्य!
इस पूरे मामले में खास बात यह सामने आई है कि कथित ऑडियो-टेप में स्वाति सिंह ने सूबे के चीफ मिनिस्टर योगी आदित्यनाथ का पदनाम लेकर उन्हें भी घिरवा डाला है. जबकि यूपी पुलिस में दबंग छवि वाली पुलिस क्षेत्राधिकारी बीनू सिंह से हर कोई मिलने को आतुर है. सिर्फ इसलिए कि वह महिला मंत्री महोदया के हड़काने के बाद भी खुद को तहजीब की पटरी से नीचे उतारने से साफ बचा ले गईं.
इस पूरे घटनाक्रम मे जो हुआ सो हुआ, सबसे ज्यादा गंभीर और हास्यास्पद यह है कि कल तक महिला मंत्री स्वाति सिंह को राज्य के जो पुलिस महानिदेशक सैल्यूट ठोंकते थे, उन्हीं पुलिस महानिदेशक की जांच रिपोर्ट अब मंत्री स्वाति सिंह का भविष्य तय करेगा.
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बेल्थरा रोड में टिकट से लेकर पार्टी तक, किसे पसंद कर रहे लोग? ऑनलाइन सर्वे में सामने आए चौकाने वालेआंकड़े
बलिया ख़बर के ऑनलाइन सर्वे के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, विधायक हंसू राम को उनके कामकाज के लिए औसतन 10 में से 3.43 अंक मिले। वहीं, दोबारा टिकट देने के सवाल पर 71.7 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ‘नहीं’ कहा। पार्टी की पसंद के सवाल पर बीजेपी 39.8 प्रतिशत के साथ पहले और समाजवादी पार्टी 36.2 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रही।
1. विधायक हंसू राम के कामकाज की औसत रेटिंग 3.43
बलिया ख़बर के ऑनलाइन सर्वे में प्रतिभागियों से पूछा गया कि वे अपने विधायक हंसू राम के काम को 1 से 10 के बीच कितने अंक देंगे। इस सवाल पर औसत रेटिंग 3.43 दर्ज की गई।

आंकड़ों के अनुसार, दोबारा टिकट देने के सवाल पर ‘नहीं’ कहने वाले प्रतिभागियों का प्रतिशत सबसे अधिक रहा। यह नतीजा ऑनलाइन सर्वे में शामिल लोगों की राय को दर्शाता है।
2. 2027 में किस पार्टी का विधायक चाहते हैं ?
अगले विधानसभा चुनाव में किस पार्टी का विधायक बनना चाहिए, इस सवाल पर बीजेपी को सबसे अधिक 39.8 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। समाजवादी पार्टी 36.2 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रही।

पार्टी की पसंद के आंकड़ों में बीजेपी और सपा के बीच 3 प्रतिशत अंकों का अंतर दिखाई देता है। हालांकि, ये आंकड़े सर्वे में भाग लेने वाले प्रतिभागियों की पसंद पर आधारित हैं, न कि चुनाव परिणाम का अनुमान।
3. सुभासपा में प्रवीण प्रकाश पहली पसंद
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) से कौन-सा नेता पहली पसंद है, इस सवाल पर प्रवीण प्रकाश को 54.2 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। मौजूदा विधायक हंसू राम को 25 प्रतिशत समर्थन मिला, जबकि 20.8 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य नेताओं का विकल्प चुना।

इस सवाल के आंकड़ों में प्रवीण प्रकाश को हंसू राम से 29.2 प्रतिशत अंक अधिक मिले।
4. बीजेपी में धनंजय कनौजिया को 34.4% समर्थन
बीजेपी से संभावित उम्मीदवार के सवाल पर धनंजय कनौजिया को 34.4 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अपनी पहली पसंद बताया। जबकि छठू राम को 21.9 प्रतिशत समर्थन मिला। गोरख पासवान को 18.8 और रीना राव को 15.5 प्रतिशत, 9.4 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य नेताओं को चुना।

बीजेपी के विकल्पों में धनंजय कनौजिया को सबसे अधिक समर्थन मिला। वहीं, अन्य नेताओं के विकल्प को चुनने वाले प्रतिभागियों का प्रतिशत भी 9.4 रहा।
5. समाजवादी पार्टी में राजेश पासवान को 35 .5% समर्थन
समाजवादी पार्टी से पहली पसंद के सवाल पर राजेश पासवान को 35.5 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। वहीं, संतोष गर्ग को 20.9 प्रतिशत ने अपनी पसंद बताया।

सपा के आंकड़ों में नामित नेताओं में राजेश पासवान को सबसे ज्यादा समर्थन मिला। अन्य नेताओं का विकल्प 35.7 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर रहा
6. बसपा में अनुज कुमार भारती को 26.9% समर्थन
बहुजन समाज पार्टी से पहली पसंद के सवाल पर उपलब्ध आंकड़ों में अनुज कुमार भारती को 26.9 प्रतिशत और संतोष कुमार को 7.7 प्रतिशत प्रतिभागियों ने चुना। वहीं, 42.3 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य विकल्प को प्राथमिकता दी।

इस सवाल के उपलब्ध आंकड़ों में शेष विकल्पों का पूरा विवरण नहीं है, इसलिए उनकी जानकारी अलग से नहीं जोड़ी गई है।
7. कांग्रेस में 69.2% ने चुना अन्य नेताओं का विकल्प
कांग्रेस पार्टी से पहली पसंद के सवाल पर 69.2 प्रतिशत प्रतिभागियों ने अन्य नेताओं का विकल्प चुना। पारस वर्मा और अखिलेश कनौजिया को 15.4-15.4 प्रतिशत समर्थन मिला।

कांग्रेस के आंकड़ों में किसी एक नामित नेता के बजाय अन्य नेताओं के विकल्प को सबसे अधिक प्रतिभागियों ने चुना।
बेल्थरा रोड में टिकट और पार्टी की पसंद पर क्या कहते हैं आंकड़े?
बलिया ख़बर के ऑनलाइन सर्वे में तीन प्रमुख पहलू सामने आए हैं। पहला, मौजूदा विधायक हंसू राम के कामकाज की औसत रेटिंग 3.43 रही। दूसरा, 71.7 प्रतिशत प्रतिभागियों ने उन्हें दोबारा टिकट देने के पक्ष में राय नहीं दी। तीसरा, पार्टी की पसंद के सवाल पर बीजेपी को 39.8 प्रतिशत और सपा को 36.2 प्रतिशत समर्थन मिला।
उम्मीदवारों की पसंद के सवाल पर सुभासपा में प्रवीण प्रकाश, बीजेपी में धनंजय कनौजिया और सपा में राजेश पासवान को नामित विकल्पों में सबसे अधिक समर्थन मिला। बसपा और कांग्रेस के सवालों में अन्य नेताओं के विकल्प को चुनने वालों का प्रतिशत भी उल्लेखनीय रहा।
सर्वे के बारे में जरूरी जानकारी
यह सर्वे बलिया ख़बर द्वारा ऑनलाइन माध्यम से कराया गया था। ऊपर दिए गए प्रतिशत सर्वे में शामिल प्रतिभागियों के जवाबों पर आधारित हैं। इन नतीजों को पूरी बेल्थरा रोड विधानसभा के सभी मतदाताओं की राय का प्रतिनिधि सर्वे नहीं माना जाना चाहिए। ये आंकड़े सर्वे में भाग लेने वाले लोगों की पसंद और राय को सामने रखते हैं।
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बलिया विधानसभा सर्वे 2027
2027 का विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहा है और बलिया नगर सीट पर सियासी हलचल तेज़ है। विधायक दयाशंकर सिंह के कामकाज को आप कैसे आंकते हैं? क्या उन्हें फिर से मौका मिलना चाहिए, और 2027 में आप किस पार्टी और किस चेहरे को विधायक के रूप में देखना चाहते हैं? बलिया ख़बर के इस सर्वे में अपनी राय दर्ज करें।
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बलिया BJP की इनसाइड स्टोरी! संगठन में पद की लड़ाई अश्लील वीडियो तक आई?
बलिया। बांसडीह में भाजपा से जुड़ी महिला कार्यकर्ता के निजी वीडियो के कथित प्रसार को लेकर दर्ज मुकदमे ने अब संगठन के भीतर चल रही कथित खींचतान की चर्चाओं को भी हवा दे दी है। सवाल उठ रहा है कि क्या संगठन में पद और प्रभाव की लड़ाई का विवाद इतना बढ़ गया कि मामला निजी वीडियो तक जा पहुंचा? सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे प्रकरण के पीछे संगठन में पद पाने की कथित होड़ और आपसी राजनीतिक खींचतान का एंगल भी सामने आ रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस जांच में ही वास्तविक तस्वीर साफ होगी।
क्या है पूरा मामला?: बांसडीह थाना क्षेत्र में भाजपा से जुड़ी एक महिला कार्यकर्ता ने पुलिस में शिकायत देकर आरोप लगाया कि उसका निजी वीडियो उसकी अनुमति के बिना प्रसारित किया जा रहा है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।
मामले में नामजद आरोपियों में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों के नाम होने की बात सामने आई है। महिला ने अपनी शिकायत में बताया है कि वीडियो कॉल के दौरान उसका निजी वीडियो बनाए जाने और बाद में उसके प्रसारित होने की जानकारी उसे बातचीत के दौरान मिली। शिकायतकर्ता ने पुलिस को संबंधित बातचीत के ऑडियो-वीडियो साक्ष्य उपलब्ध होने की बात भी कही है।
पद की कथित लड़ाई से जुड़ा दूसरा एंगल : सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे मामले की एक दूसरी तस्वीर भी सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि संगठन में पद और जिम्मेदारी को लेकर कुछ लोगों के बीच कथित तौर पर अंदरूनी खींचतान चल रही थी। इसी खींचतान के बीच विवाद ने ऐसा रूप लिया कि कुछ लोगों ने कथित तौर पर एक-दूसरे को निशाने पर लेने और फंसाने के लिए मामले का फायदा उठाया।
सूत्रों का यह भी कहना है कि संगठनात्मक पद को लेकर चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच व्यक्तिगत विवाद भी जुड़ता चला गया और आखिरकार मामला पुलिस तक पहुंच गया। हालांकि, यह दावा फिलहाल सूत्रों के हवाले से है। पुलिस जांच में इसकी पुष्टि होना बाकी है कि कथित संगठनात्मक खींचतान का इस मामले से वास्तव में कोई सीधा संबंध है या नहीं।
जिले से लेकर लखनऊ तक मामला पहुंचाने की होड़?: इस पूरे प्रकरण को लेकर सूत्र एक और महत्वपूर्ण दावा कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, जिले से जुड़े भाजपा के कुछ प्रभावशाली नेता कथित तौर पर मामले को दबाने की कोशिश में जुटे हैं, जबकि दूसरी ओर कुछ नेता इस प्रकरण को लखनऊ तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।
यानी एक तरफ मामले को स्थानीय स्तर पर संभालने और शांत कराने की कोशिश की चर्चा है, तो दूसरी तरफ इसे पार्टी के उच्च स्तर तक ले जाने की कवायद की बात सामने आ रही है। सूत्रों का दावा है कि इसके पीछे भी संगठन में पद और प्रभाव को लेकर चल रही अंदरूनी खींचतान एक वजह हो सकती है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज: मामले में भाजपा से जुड़े पदाधिकारियों के नाम सामने आने के बाद स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस की जांच, डिजिटल साक्ष्य और शिकायतकर्ता की ओर से उपलब्ध कराए गए कथित वीडियो एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
फिलहाल बांसडीह पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि यह मामला केवल निजी वीडियो के कथित प्रसार का है या इसके पीछे संगठनात्मक पद की कथित लड़ाई, आपसी विवाद और राजनीतिक खींचतान की भी कोई भूमिका रही है।
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