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Ballia- विधायक उमाशंकर सिंह ने कराया दंगल, नेपाली पहलवानों ने भी आजमाया हाथ
बलिया। रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा विधायक उमाशंकर सिंह ने शनिवार को अपने पैतृक गांव खनवर में दंगल का आयोजन कराया। हर साल की तरह इस बार भी खाकी बाबा के स्थान पर दंगल प्रतियोगिता हुई। दंगल में बलिया के अलावा अन्य जिलों से भी पहलवान आए थे। इतना ही नहीं नेपाल से आए पहलवानों ने भी यहां हाथ आजमाया। प्रतियोगिता में कई पहलवानों की कुश्ती बराबरी पर छूटी। जबकि कुछ ने अपने प्रतिद्वंदी को पटखनी देते हुए जीत हासिल की।
पहलवानों का बलपौरुष और जोर -आजमाइश का रोमांचकारी मुकाबला हरपल कौतुहल पैदा कर रहा था, कोई भी पहलवान किसी से कम नहीं था। प्रतियोगिता में अपार जनसैलाब देखने को मिला। ऐसे में विधायक उमाशंकर ने जनता का आभार जताया।
साथ ही कहा कि दंगल भारतीय संस्कृति की परंपरागत और प्राचीन मनोरंजन की विधा है, इसी परंपरा को आपसी सौहार्द के साथ परस्पर सम्बन्धों की प्रगाढ़ता की कड़ी में आगे बढ़ाया। देश की विलुप्त होती दंगल प्रतियोगिता का आयोजन कर देश की संस्कृति को युवाओं में जीवंत करने की कोशिश की। जनता का भी भरपूर सहयोग मिला।
महिला पहलवानों ने भी आजमाया हाथ- बता दें कि, इस प्रतियोगिता में कई पहलवानों की कुश्ती बराबरी पर छूटी। जबकि कुछ ने अपने प्रतिद्वंदी को पटखनी देते हुए जीत हासिल की। खास बात यह रही कि इस प्रतियोगिता में महिला पहलवानों ने भी हाथ आजमाया। इससे पहले, दंगल प्रतियोगिता का शुभारंभ चंदौली जिले के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष व बीजेपी नेता छत्रबली सिंह ने फीता काटकर किया।
कोरोना काल में स्थगित कर दिया गया था आयोजन– कोरोना काल में स्थगित कर दिया गया आयोजन इस मौके पर कार्यक्रम के संयोजक बसपा विधायक उमाशंकर सिंह ने कहा, कि ‘यह प्रतियोगिता पिछले कई वर्षों से आयोजित
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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