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VIDEO – कभी मोदी तो कभी योगी बन जाते हैं निलेश, बलिया को मिला नया आर्टिस्ट
बिल्थरा रोड डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हो या कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ , सदाबहार राजनेता बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव से लेकर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव , बॉलीवुड तथा भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार की हूबहू आवाज निकालते हैं निलेश मद्धेशिया दीपू । दीपू की आवाज का नकल करने के अंदाज को सोशल नेटवर्किंग साइट से लेकर यूट्यूब व विभिन्न चैनलों पर खूब पसंद किया जा रहा है ।
होनहार बिरवान के होत न चिकने पात की कहावत को चरितार्थ करते जिले के बिल्थरा रोड नगर पंंचायत के निवासी नीलेश दीपू देश के जाने माने राजनेताओं, फिल्म हस्तियों, विभिन्न गाड़ियों, कार्टूनों और जानवरों की आवाज निकाल आयेदिन शोहरत बटोर रहे हैं । 26 वर्ष के वय में दीपू के उपनाम से चर्चित नीलेश आवाज निकालने की अपनी अदा से न सिर्फ अपनी एक अलग पहचान बनाते नजर आ रहे हैं ,बल्कि हर उम्र के लोगों के चहेते बन गए हैं । जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लेकर पड़ोसी जनपदों में दीपू किसी न किसी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाते नजर आते हैं ।
हर जगह बढ़ रही लोकप्रियेता
इनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनकी मिमिक्री को सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक, व्हाट्सएप व यूट्यूब पर काफी पसंद किया जा रहा है । आवाज के बेताज बादशाह नीलेश दीपू के कंठ में ऐसी कला है , जो किसी को भी हैरान कर देती है । तकरीबन 9 साल की उम्र में ही दीपू ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा के दौरान अपने शिक्षकों व दोस्तों के आवाज की नकल करना शुरू कर दिया । वह न्यूजट्रैक से बातचीत में कहते हैं कि पहले तो उनके सहपाठी उसकी इस अदा पर हँसते थे लेकिन समय के साथ उनकी मिमिक्री को पसंद किया जाने लगा। वह बताते हैं कि उनके गुरुजनों व दोस्तों ने उनका काफी उत्साहवर्धन किया ।
एक मध्यमवर्गीय परिवार से जुड़े दीपू के बड़े भाई अवधेश केंद्रीय विद्यालय में शिक्षक हैं तथा मझले भाई कमलेश विभिन्न प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे हैं । वह बताते हैं कि प्रारम्भिक शिक्षा के दौरान मिले उत्साहवर्धन की ही देन है कि उन्होंने लगातार जीतोड़ कोशिश किया । यह जुनून उनको सोने नही देता था । आवाज की नकल निकालने के जज्बे ने दीपू को आज प्रसिद्धि के मुकाम पर पहुँचा दिया है । उनसे किसी प्रसिद्ध कलाकार के आवाज की फरमाइश की होड़ सी मची रहती है ।
कई हस्तियों की आवाज़ निकाल लेते है
दूसरों की आवाज की कॉपी करने में महारत हासिल करने वाले दीपू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर सोनिया गांधी ,राहुल गांधी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,पूर्व मुख्यमंत्री मायावती,पूर्व पीएम डॉ मनमोहन सिंह, पूर्व सी एम मुलायम सिंह यादव, पूर्व सी एम अखिलेश यादव आदि के अलावा राजनेता फिल्म हस्तियों शाहरुख खान अक्षय, कुमार ,अमिताभ बच्चन, आमिर खान, नाना पाटेकर ,रवि किशन, राजकुमार ,दिनेश लाल यादव निरहुआ की हुबहू आवाज निकाल लेते हैं ।
रामायण व महाभारत के प्रमुख पात्रों के डायलॉग निलेश को कंठस्थ है । नीलेश के मिमिक्री के बहुतेरे वीडियो मार्केट में भी आ चुके हैं । फेसबुक व यूट्यूब पर इनके सब्सक्राइब फॉलोअर्स लगातार बढ़ रहे हैं । हाल ही में एक निजी चैनल पर इनके प्रसारित वीडियो को 1 दिन में 12 लाख लोगों ने देखा व पसंद किया ।
विडियो हुआ वायरल
दीपू ने हाल ही में कोविड -19 पर आधारित एक बचाव संदेश मिमिक्री जारी किया है । इसका वीडियो अनेक चैनल पर वायरल हुआ है। इसमे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवाज को हूबहू दर्शाया गया है। आजमगढ़ के एक निजी विद्यालय से बी टी सी दीपू के वीडियो को बहुतेरे लोग भावविभोर होकर देख व सुन रहे हैं । अपने तीन भाइयों में सबसे छोटे नीलेश बताते है कि वह किसी भी समय दो सौ से अधिक लोगो की मिमिक्री कर सकते हैं ।
रिपोर्ट- अनूप कुमार हेमकर
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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न
26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।
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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र
बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।
भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।
शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।
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