अगले साल से सरकारी मेला कहलाएगा बलिया का ऐतिहासिक ददरी मेला, जानिए सालों पुराना इतिहास

बलिया। उत्तर प्रदेश के बलिया में हर साल लगने वाला ऐतिहासिक ददरी मेला अगले साल से सरकारी मेला कहलाएगा। जिसकी जानकारी प्रदेश के परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह ने दी। बता दें इस साल 8 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा स्नान के साथ शुरू हुआ यह मेला 30 नवंबर तक चलेगा।

परिवहन मंत्री दया शंकर सिंह ने बताया कि सरकार अगले साल से इसे सरकारी मेला घोषित करेगी इसके आयोजन के लिए ददरी मेला प्राधिकरण बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल में अपने बलिया दौरे में महर्षि भृगु गलियारे के लिए जिला प्रशासन से प्रस्ताव मांगा था। उन्होंने कहा कि अगले साल से यह मेला और भव्य स्वरूप में दिखाई देगा।कार्तिक पूर्णिमा पर संगम – ददरी मेला का इतिहास बहुत पुराना है, बलिया में गंगा-सरयू मिलन का साक्षी ददरी मेला हर साल कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होता है। ददरी मेले से संबंधित विभिन्न मान्यताएं हैं। एक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु को पैर से मारने के बाद महर्षि भृगु को श्राप से मुक्ति इसी क्षेत्र में ही मिली थी। ददरी मेले पर आधा दर्जन से ज्यादा किताबें लिखने वाले इतिहासकार शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने ‘पीटीआई-भाषा’ में बताया कि ऐसी भी मान्यता है कि महर्षि भृगु ने अपने शिष्य दर्दर मुनि के जरिए अयोध्या से सरयू नदी को बलिया लाकर कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही गंगा- सरयू नदी का संगम कराया।

5 हज़ार साल पहले शुरू हुआ दादरी का मेला– साथ ही बताया कि इसी तट पर दर्दर मुनि के नेतृत्व में यज्ञ हुआ था, जो एक माह तक चला इस यज्ञ में 88 हजार ऋषियों का समागम हुआ और यहीं पर महर्षि भृगु ने ज्योतिष की विख्यात पुस्तक भृगु संहिता की रचना की कौशिकेय ने बताया कि यज्ञ के बाद से ही 5,000 वर्ष ईसा पूर्व ददरी मेले की शुरुआत हुई। 1707 ईसवी में मुगल सम्राट अकबर ने मेले में मीना बाजार स्थापित किया था और बलिया के जिला बनने के बाद साल 1889 से इस मेले का आयोजन जिला प्रशासन और नगर पालिका परिषद कर रहा है।

चीनी यात्री अपनी किताब में कर चुका मेला का जिक्र– टाउन इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. अखिलेश सिन्हा ने बताया कि ददरी मेले की ऐतिहासिकता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चीनी यात्री फाह्यान ने इस मेले का जिक्र अपनी एक पुस्तक में किया है ददरी मेले का पशु बाजार देश और दुनिया में मशहूर है, लेकिन इस बार लंपी संक्रमण के चलते इसका आयोजन नहीं हुआ। बलिया नगर पालिका परिषद के अधिकारी सत्य प्रकाश सिंह ने बताया कि पशुओं में लंपी रोग के कारण इस बार मेले में पशु मेला नहीं लगा।

Ritu Shahu

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