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बलिया- योगी सरकार के चार साल बेमिसाल की खुली पोल !

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बलिया डेस्क:  सूबे में योगी आदित्य नाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के चार साल बेमिसाल पूरे हो गये। इसके बीच बहुत कुछ बदला, नहीं बदला तो विभिन्न गांवों को जोडऩे वाले सम्पर्क मार्गों की तश्वीर। ऐसे सम्पर्क मार्गों पर चार वर्ष पूर्व के छोटे-छोटे गढ्ढे सुरसा के मुंह की तरह अपना आकार बढ़ा चुके है। आलम यह है कि उक्त मार्गों पर चलने वालों को पता ही नहीं चलता कि मार्ग पर गढ्ढे हैं या फिर गढ्ढे में सड़क है। हालांकि चार वर्ष पूर्व जब प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनीं थी। तब सूबे के मुखिया योगी जी ने जून 2017 तक प्रदेश के सभी मार्गों को गढ्ढा मुक्त करने का आदेश दिया गया था।

उस समय कुछ मार्गों पर गिट्टी आदि डालकर मरम्मत भी किया गया था लेकिन उसके बाद यह आदेश ठंडे बस्ते में चला गया। तब से गांव गिरानों को जोडऩे वाले सम्पर्क मार्गों की स्थिति बद से बद्तर होती गयी। क्षेत्र के लगभग 6 किमी लम्बा रेवती-कुसौरी मार्ग,5 किमी लम्बा रेवती-हडिय़ां कला सम्पर्क मार्ग पर बने बड़े-बड़े गढ्ढों की संख्या इतनी ज्यादा है कि इस पर चलने वाले साईकिल,बाइक सवार की बात कौन करे पैदल चलने वाले लोग भी आए दिन घायल होते रहते हैं।

चौबे छपरा ढ़ाला से कुंआं पीपर को जोडऩे वाला सम्पर्क मार्ग,कोलनाला-दल छपरा सम्पर्क मार्ग,रेवती-खरिका सम्पर्क मार्ग,पचरुखा-अघैला-दुधैला सम्पर्क मार्ग, रेवती रेलवे स्टेशन सम्पर्क मार्ग,रति छपरा सम्पर्क मार्ग,रेवती-झरकटहां,हडिय़ां कला-सहतवार सम्पर्क मार्ग आदि इतने उखड़-खाबड़ एवं जर्जर हो गये है कि इनकी स्थित कतई चलने लायक नहीं है।


जब ग्रामीणों ने किया चुनाव का बहिष्कार
गांव को जोडऩे वाले संपर्क मार्ग को बनानें की मांग को लेकर लोकसभा चुनाव के दौरान छोटकी बेलहरी के ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार किया था। यही नहीं चुनाव के दिन शाम के समय पुलिस प्रशासन एवं ग्रामीणों में भिड़ंत भी हो गई थी। गांव को तीन तरफ से जोडऩे वाले संपर्क मार्गों की स्थिति इतनी दयनीय है कि यहां कोई किराए का वाहन भी आने को तैयार नहीं होता है।19 मई को लोकसभा चुनाव के मतदान में गांव की एक भी ग्रामीण में मतदान में भाग नहीं लिया था। चुनाव वाले दिन शाम को तीन व्यक्तियों का जबरन मजिस्ट्रेट द्वारा मतदान कराने को लेकर ग्रामीण पुलिस प्रशासन से भी भिड़ गए थे।

धरोहर तक जाने वाले मार्ग का भी नहीं सुधरा हाल

आजादी की लड़ाई का मूक गवाह सांसद आदर्श ग्राम कुशहर स्थित मुडि़कटवा जाने वाले संपर्क मार्गों की भी स्थिति धूल धूसरित है। यहीं वीरवर बाबू कुंवर सिंह की रणस्थली शौर्य स्थल स्थित है परंतु वहां जाने के लिए किसी भी संपर्क मार्ग की स्थिति सही नहीं है।जबकि यहां प्रत्येक 22 अप्रैल को शौर्य दिवस का आयोजन भी होता है। यही यहां के स्थानीय आजादी के दीवानों ने कुंवर सिंह की प्राण रक्षा में 107 अंग्रेज सैनिकों को प्राणहीन कर दिया था।संयुक्त किसान सभा के जिलाध्यक्ष लक्ष्मण पाण्डेय ने कहा कि सरकार द्वारा तत्काल सम्पर्क मार्गों की मरम्मत कार्य नहीं कराया गया तो फिर आंदोलन ही एक मात्र रास्ता होगा।

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Photos- जमुना राम मेमोरियल स्कूल में गणतंत्र दिवस समारोह हर्षोल्लास से संपन्न

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26 जनवरी 2026 को जमुना राम मेमोरियल स्कूल के प्रांगण में 76वां गणतंत्र दिवस समारोह बड़े हर्षोल्लास, उत्साह और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ। विद्यार्थियों ने अनुशासित मार्च-पास्ट के माध्यम से राष्ट्रीय ध्वज को सलामी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संस्था के अध्यक्ष प्रोफेसर धर्मात्मानंद जी ने ध्वजारोहण किया। अपने प्रेरणादायक संबोधन में उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में निहित प्रावधानों का पालन करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर सेना से सेवानिवृत्त महानुभूतियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे समारोह की गरिमा और भी बढ़ गई।

कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति गीतों ने सभी को भावविभोर कर दिया। हरियाणवी नृत्य, “मां से ही माटी” थीम पर आधारित प्रस्तुति, “पधारो मारे देश”, कव्वाली, उत्तर-पूर्व भारत का प्रसिद्ध बिहू नृत्य तथा योग प्रदर्शन को दर्शकों ने खूब सराहा। गरबा और भांगड़ा नृत्य भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “वराह रूपम” नृत्य एवं कथकली प्रस्तुति रही, जिसने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। संस्था के निदेशक तुषार नंद जी एवं सौम्या प्रसाद जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान में निहित मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों एवं समानता के सिद्धांतों पर आधारित समाज के निर्माण से ही भारत को विश्वगुरु बनाने का सपना साकार हो सकता है।

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य अजीत कुमार सिंह ने सभी आगंतुकों, अतिथियों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारीगण के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की सफलता में कोऑर्डिनेटर नीतू मिश्रा एवं अरविंद चौबे की विशेष सहभागिता रही।

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UGC के ‘Equity Rules’ में स्पष्टता व संतुलन की मांग, बलिया के भानु प्रकाश सिंह ने चेयरमैन को लिखा पत्र

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बलिया। ध्रुवजी सिंह स्मृति सेवा संस्थान, पूर-बलिया के सचिव भानु प्रकाश सिंह ‘बबलू’ ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन डॉ. विनीत जोशी को पत्र भेजकर यूजीसी विनियम, 2026 में आवश्यक स्पष्टीकरण और सुधार की मांग की है। उन्होंने पत्र की प्रतिलिपि राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, गृह मंत्री एवं रक्षा मंत्री को भी भेजते हुए इस विषय पर शीघ्र और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता जताई है।

भानु प्रकाश सिंह ने यूजीसी विनियमों के उद्देश्य को सराहनीय बताते हुए कहा कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संविधान के अनुच्छेद 14, 15(1) एवं 21 तथा नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संतुलित, स्पष्ट और न्यायसंगत व्यवस्था अनिवार्य है। उन्होंने समता समिति के गठन, उसकी संरचना और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता, संतुलन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की।

शिकायतों के निस्तारण के लिए एक समान मानक कार्य-प्रणाली (एसओपी) तय करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि केवल आरोप के आधार पर कठोर कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है। किसी भी दंडात्मक कदम से पूर्व प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक होनी चाहिए। साथ ही झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी स्पष्ट प्रावधान किए जाने की मांग की गई।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में नियमों का पालन सहयोग, मार्गदर्शन और न्याय की भावना पर आधारित होना चाहिए, न कि पुलिसिंग या अत्यधिक निगरानी जैसा वातावरण बनाकर। इसके अतिरिक्त उच्च शिक्षा को शोध और नवाचार का मजबूत केंद्र बनाने के लिए रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण, साझा प्रयोगशालाओं की स्थापना, उद्योग-सहयोग, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और पेटेंट संस्कृति को प्राथमिकता देने का भी सुझाव दिया।

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