बलिया
बलियाः कुत्ते को लेकर दो पक्षों में विवाद, महिला की मौत
बलिया में मंगलवार को कुत्ते के काटने से शुरु हुआ विवाद मारपीट में बदल गया। इस मारपीट में एक महिला की मौत हो गई। जिसके बाद से ही इलाके में तनाव का माहौल है।
घटना बैरिया थाना के केहरपुर गांव की है। जहां रहने वाले एक व्यक्ति ने कुत्ता पाल रखा है। व्यक्ति के द्वारा कुत्ते को खुला छोड़ दिया जाता है, जो लोगों को काट लेता है। मंगलवार को गांव की रहने वाली 55 वर्षीय लालमनी देवी पत्नी दीनदयाल बिंद अपने घर वापस लौट रही थी, इसी दौरान वह कुत्ता ने उनके ऊपर हमला कर दिया।
इसके बाद वह कुत्ता मालिक से शिकायत करने पहुंची तो व्यक्ति ने बदतमीजी की। जिसके बाद लालमनी देवी के घर के लोग वहां पहुंचे, इसके बाद दोनों पक्षों में जमकर विवाद हो गया। इसी बीच एक युवक ने ईंट उठाकर महिला के सिर पर दे मारी। जिसके चलते वह गंभीर रुप से घायल हो गई। आनन-फानन में महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनबरसा लाया गया।
जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। जहां इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शिवसागर बिंद और आजाद बिंद को गिरफ्तार कर ली। पुलिस का कहना है कि महिला की मौत हो गई है। लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। घटना को अंजाम देने वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। गांव में पुलिस फोर्स भी तैनात की गई है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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