बलिया के लोगों के लिया अब पानी पीना भी दुश्वार हो गया है. पानी में आर्सेनिक की मात्रा अब लोगों को मरीज़ बना रही है. इसकी वजह से शादी के रिश्ते तक टूट जा रहे हैं लेकिन फिलहाल शासन प्रशासन को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है. बता दें कि बीएचयू से लेकर पीजीआई और दिल्ली के एम्स की टीम ने भी द्वाबा के पानी में मानक से कई गुना अधिक आर्सेनिक होने की पुष्टि कर दी है. फिर भी हालात जस के तस बने हुए हैं.
बीमारियों की चपेट में लोग आते जा रहे हैं. वहीँ 2002 में जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर दिपांकर चक्रवर्ती बेलहरी ब्लाक के इलाके में मानक से कहीं ज्यादा आर्सेनिक की पुष्टि कर दी थी. बताया जा रहा है कि जनपद के करीब तीन सौ दस गाँव के पानी में आर्सेनिक की मात्रा बढ़ चुकी है. बड़ी बात यह है कि जिन इलाकों में आर्सेनिक की पुष्टि हो चुकी है वहां पर लड़के लड़कियों का रिश्ता तक नहीं लग रहा है. लोग यहाँ शादी करने तक से कतराने लगे हैं.
ऐसे में हालात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है. यहाँ पर लोगों को स्किन की परे’शानी होने लगी है.
हालाँकि इन गांवों में आर्सेनिक रिमूवल प्लांट से लेकर 54 ओवर हेड टैंक तो लगाये गए लेकिन इसके बाद पानी ई टंकी में भी आर्सेनिक की मात्रा अधिक पाई जाने लगी. सही देखभाल नहीं करने से प्लांट भी ख़राब हो चला.
करीब दस साल पहले यहाँ आई आई हैदराबाद की टीम ने गंगा के किनारे इंटकवेल बनाकर शुद्ध पानी उपलब्ध कराने का सुझाव दिया था लेकिन प्रशासन न यह कहते हुए ट्रीटमेंट प्लांट लगाने से इनकार कर दिया था कि यह पूरा कटान का क्षेत्र है. डॉक्टरों का कहना है कि आर्सेनिक का बुरा प्रभाव शरीर के अंगों पर भी पड़ सकता है. इससे कैंसर और कैंसर जैसी बीमारी भी हो सकती है.
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