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बलियाः अब 4 मई तक भागलपुर पुल पर बंद रहेगा आवागमन
बलिया के भागलपुर पुल पर वाहनों का आवागमन 4 मई तक बंद रहेगा। पहले 1 मई तक आवागमन बंद रखा गया था लेकिन जर्जर पुल का मरम्मत कार्य पूरा न होने के चलते विभाग ने अब 4 मई तक वाहनों की आवाजाही बंद रखने का निर्णय लिया है।
सरयू नदी पर बना भागलपुर पुल बलिया को देवरिया और बिहार से जोड़ता है। इस पुल पर रोजाना सैंकड़ों वाहन गुजरते हैं। अब पुल बंद होने से यात्रियों को नाव से सफर करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा स्कूली बच्चे प्रभावित हैं। जिन्हें भीषण गर्मी पर पैदल चलकर जाना पड़ रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शादी की सीजन होने के चलते देवरिया व बिहार बारात ले जाने में भी दिक्कत हो रही हैं। पुल पर आवागमन बंद होने से लोगों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। पहले 1 मई तक पुल चालू होने वाला था लेकिन अभी मरम्मत का काम पूरा नहीं हो पाया। रविवार को पुल के निरीक्षण के दौरान कई सारा मरम्मत का कार्य बाकी नजर आया।
उधर सेतु निगम देवरिया के परियोजना प्रबंधक एस पी सिंह का कहना है कि कंक्रीट तोड़ने व अन्य कार्य में काफी समय लग रहा है। जिसके चलते पुल की मरम्मत में देरी हो रही है। कहा कि मरम्मत की समयावधि 1 मई तक के लिए थी परन्तु अब इसे बढ़ाकर 4 मई तक की जा रही है। 4 मई के बाद पुल पर वाहनो का आवागमन शुरू हो जाएगा।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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