बलिया में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बीते चार दिनों से घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। लिहाजा तटीय इलाकों में दहशत का माहौल है। घाघरा की उफनती लहरों से बिल्थरारोड के तटवर्ती क्षेत्रों में लोगों में खौफ का माहौल है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बृहस्पतिवार को नदी का जलस्तर 65.240 मीटर दर्ज किया गया जो खतरे के निशान 64.010 मीटर से 1.23 मीटर ऊपर है। आयोग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर में वृद्धि होने का पूर्वानुमान किया है। नदी का पानी एक- एक सेंटीमीटर प्रति घंटा के रफ्तार से बढ़ रहा है।
कई गांवों में नदी का पानी पहुँच गया है। गांवों में नाव चल रही है। बरहज में बना पीपा का पुल टूटकर नदी में बह रहा है। घाघरा नदी के तांडव को देखते हुए शुक्रवार को जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल एसपी राजकरन नैय्यर ने हल्दिरामपुर रेगुलेटर, तुर्तीपार,टन्गुनिया, हाहानाला का पहुँचकर निरीक्षण किया।
उपजिलाधिकारी दीपशिखा सिंह ने नाव पर बैठकर टन्गुनिया गांव का निरीक्षण किया। इस दौरान डीएम और एसपी ने प्रभावित वाशिन्दों को हर सम्भव मदद का भरोसा दिया। बता दें कि तटवर्ती गांवों में किसानों को काफी ज्यादा नुकसान हो रहा है। खेत डूब गए हैं। फसलें चौपट हो गई हैं। तुर्तीपार, हाहानाला, राजभर बस्ती टगुनिया, गुलौरा गांव, मुजौना के कई घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। जिससे ग्रामीणों को घोर फजीहत उठानी पड़ रही है। पशुपालकों के सामने पशुओं का भूसा भींग जाने के चलते पशुओं को चारे की दिक्कत हो गई है।
इधर बाढ़ के पानी से तुर्तीपार शमशान घाट भी पूरी तरह से डूब गया है। शमशान के डूब जाने की स्थिति में लोग बंधे पर ही मृतकों का अंतिम संस्कार करने को विवश हैं। शमशान घाट के साथ ही उसके मार्ग पर भी पानी बहने से लोगों को अपना जूता हाथ में लेकर पानी में चलना मजबूरी बन गई है। शव की अंत्येष्टि के लिए लकड़ियां ले जाना भी लोगों के लिए कठिन हो गया है। अब शमशान घाट का बंधे पर ही मृतकों की अंत्येष्टि जारी है।
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