बलिया: पेट्रोल पंप पर फर्जीवाड़ा, प्रशासन पर उठे सवाल

बलिया ज़िले के सिंकदरपुर में तेल पंप पर पेट्रोल देने में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। पेट्रोल कम देने को लेकर पंप पर कथित आरोप लगा और जमकर हंगामा भी हुआ। बात इतनी बढ़ गई कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। लेकिन आरोप है कि पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाए सुलह कराने का दबाव बनाया। आरोप है कि इससे पहले पंप मालिक के लोग खरीददारों को धमकी भी दे चुके थे।

मामला सिकंदरपुर के इंद्रासिनी फीलींग किसान सेवा केंद्र का है। एक बाइक पर तीन लोग सवार होकर तेल पंप पर पहुंचे। इनमें नगरा के रहने वाले अभिषेक कुमार गौतम, अरुण कुमार संगम और अनुप कुमार जाटव थे। बकौल अरूण बाइक में 100 रुपए का पेट्रोल भरवाया गया। लेकिन मशीन की रीडींग 80 रुपए से शुरू होकर 100 रुपए पर ही रुक गई।

बाइक सवार युवकों ने इसका विरोध किया। अरुण कुमार संगम ने बताया कि “हम लोगों ने पंप कर्मचारियों से पेट्रोल की रीडींग कंप्यूटर पर दिखाने की बात कही। पहले वो नहीं माने और धमकाने लगे। लेकिन विरोध करने के बाद पंप के ही एक अन्य व्यक्ति ने बाइक की टंकी से तेल निकलवाकर देखा। टंकी से बमुश्किल 600 से 700 ग्राम तेल निकला था। जबकि पहले से ही थोड़ा बहुत तेल था।”

तेल कम होने पर अरुण अपने दोस्तों के साथ मिलकर विरोध करने लगे। हंगामा बढ़ा। अरुण के मुताबिक “बवाल होने पर लोग इकट्ठा हो गए। तभी युवराज विनीत पांडेय उर्फ बिट्टू पांडेय नाम के एक युवक ने हमें धमकी दी। हम लोगों ने पुलिस को फोन किया। सिंकदरपुर थाना के एसओ योगेश यादव आए। लेकिन उन्होंने कहा कि 100 रुपए का तेल ले लो और मामला खत्म करो। पंप के फर्जीवाड़े और हमें धमकी देने को उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया।” वहीं धमकी के आरोपों पर “युवराज विनीत पांडेय उर्फ बिट्टू पांडेय ने साफ इंकार किया है। युवराज विनीत पांडेय का कहना है कि हम लोग समझा रहे थे किसी ने कोई धमकी नहीं दी है ये लोग मंगढ़त कहानी बना रहे हैं।”

क्या ये मामला सिर्फ 100 रुपए का तेल लेने पर कम मिलने का है? जिसके बाद हंगामा होता है और 3 युवकों को धमकी दी जाती है। असल सवाल ये है कि क्या ऐसी गड़बड़ी सिर्फ इस बार ही हुआ? क्या तेल पंप पर पेट्रोल-डीजल में बट्टा लगाने और रीडींग गलत दिखाकर तेल चोरी का खेल धड़ल्ले से चल रहा है? सवाल ये भी है कि आखिर पुलिस ने इस मामले में गंभीरता से जांच क्यों नहीं की? आखिर क्यों इसे एक सामान्य हंगामे की तरह देखा गया और एसओ योगेश यादव ने सुलह कराने की कोशिश की?

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Akash Kumar

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