बलियाः उत्तरप्रदेश सरकार सड़क निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन वही दूसरी ओर जमीनी स्तर पर विकासकार्य पर अधिकारी पलीता लगा रहे हैं। विकासकार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हैं। इसकी बानगी देखने को मिली बैरिया में, जहां चक्की नौरंगा में करोड़ों की लागत से बनी सड़क गंगा की लहरों में बह गई।
प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत बनाई गई सड़क का लगभग तीन किलोमीटर का हिस्सा और सैकड़ों एकड़ जमीन गंगा की लहरो में समा गई। सड़क बहते ही लोगों में अफरा -तफरी मच गई। लोग अपने सामान लेकर इधऱ-उधर भागने लगे और अपना सामान बहते हुए देख बेबस नजर आए।
पीड़ितों ने आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय तो वादा किया था कि इस गांव की एक इंच भूमि कटने नहीं दिया जाएगा लेकिन यह सब वादे फेल हो गए हैं। हमारी सैंकड़ों एकड जमीन गंगा में समा गई। पीड़ितों ने कहा कि हम लोगों ने अपनी उपजाऊ भूमि को गंगा की गोद में समाते अपनी आंखों से देखा है। गंगा की लहरें सैकड़ों एकड़ भूमि काटने के बाद लाखों रुपये की खर्च कर बनी पुलिया से टकराने लगी हैं।
करोड़ों की लागत से बनी सड़क एक झटके में गंगा की लहरों में समा गई, जो कहीं न कहीं इसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रही है। सड़क निर्माण में गड़बड़ी कोई नई बात नहीं हैं। जिम्मेदार करोड़ों की लागत से बनने वाली सड़कों में घटिया मेटेरियल का इस्तेमाल करते हैं, नतीजतन निर्माण के कुछ महीनों बाद ही सड़कें क्षतिग्रस्त हो जाती है और आम जनता परेशानी झेलती है।
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