बलिया के सरकारी अस्पताल का हाल बेहाल है। शायद ही ऐसा कोई दिन आया हो जब जिले के सरकारी अस्पतालों में सारी सुविधाएं टॉप पर रही हो और मरीजों को भटकना न पड़ा हो। जिले के सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं का अभाव है। यहां मरीजों को एक्सरे- अल्ट्रासाउंड जैसे बेसिक स्वास्थ्य सुविधा भी नहीं मिल पा रही हैं।
बांसडीह तहसील के अंतर्गत रेवती स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को ठीक से इलाज नहीं मिल पा रहा है। इस अस्पताल में रेवती के साथ आस-पास के दर्जनों ग्राम सभाओं के लोग आते हैं। लेकिन अस्पताल में एक्स- रे व अल्ट्रासाउंड की सुविधा न होने से मरीजों को जिला अस्पताल रेफर करना पड़ रहा है।
तत्कालीन सीएचसी अधीक्षक डा.धर्मेन्द्र कुमार का स्थानांतरण होने तथा इससे पहले डा.राहुल कुमार के चले जाने के बाद सीएचसी पर चिकित्सकों की कमी हो गई है। केवल एक चिकित्सक के सहारे ही पूरा अस्पताल चल रहा है। सीएचसी पर नये अधीक्षक डा.रोहित रंजन ही परमामेन्ट चिकित्सक के रूप में बचे हैं। हालात इतने खराब हैं कि न्यू पीएचसी भोपालपुर पर तैनात डा.जसवन्त कुमार को सीएचसी से अटैच कर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। वहीं, आरबीएसके के दो चिकित्सक सीएचसी पर हैं। दो आयुष चिकित्सक भी हैं, जिनकी ड्यूटी सप्ताह में तीन दिन ही यहां रहती है।
सबसे बड़ा समस्या है कि अस्पताल में एक्सर-रे मशीन ही नहीं हैं। अल्ट्रासाउंड मशीन के लिए चिकित्सक नहीं है। ऐसे में एक्स-रे व अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को जिला चिकित्सालय की दौड़ लगानी पड़ती है। वहीं बाल रोग विशेषज्ञ, हड्डी रोग विशेषज्ञ सहित विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। ऐसे में ग्रामीणों ने अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाने की मांग की है।
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