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बलियाः अवैध तरीके से संचालित हो रहे नर्सिंग होम, क्लीनिकों पर नकेल कसेगी पुलिस
बलिया में बिना मान्यता और निर्धारित मानक के निजी अस्पतालों का संचालन जोरों पर है। यह प्राइवेट क्लीनिक और अस्पताल लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस अब झोलाछाप क्लीनिकों की लिस्ट तैयार कर रही है।
इस कार्रवाई से निजी अस्पताल संचालकों में खलबली मची हुई है। शासन के निर्देश पर पुलिस ने नर्सिंग होम व दवाखाना का ब्योरा जुटाना शुरु कर दिया है। पुलिस सूत्रों की मानें तो एक निर्धारित प्रोफार्मा में प्राईवेट अस्पताल अथवा क्लीनिक का नाम, डॉक्टर का नाम, पता, मोबाइल नम्बर व डिग्री दर्ज करना है। इसमें इस बात की भी डिटेल्स देनी होगी कि अस्पताल में किस विधि से इलाज होता है। एलोपेथ, आयुर्वेद, होम्योपैथ अथवा यूनानी पद्धति, इसका उल्लेख करना होता है।
गौरतलब है कि बलिया के छोटे कस्बों से लेकर बड़े शहरों तक बड़ी संख्या में झोलाछाप नर्सिंग होम व क्लीनिक संचालित हो रहे हैं। इनमें से कुछ का ही सीएमओ कार्यालय में रजिस्ट्रेशन है। कई नर्सिंग होम ऐसे भी हैं, जिनका रजिस्ट्रेशन एमबीबीएस डॉक्टर के नाम पर कराया गया है लेकिन लोगों का इलाज या अस्पताल का संचालन कोई और करता है। इसके चलते लापरवाही से मौत के मामले भी सामने आते रहते हैं।
बलिया नर्सिंग होम एसोसिएशन सचिव डॉक्टर वीके गुप्ता का कहना है कि पुलिस मानक का ब्योरा जुटा रही है। यह कदम उचित है तथा इसका लाभ मानक के अनुसार संचालित हो रहे अस्पतालों को मिलेगा। नर्सिंग होम संचालक पुलिस को हर तरह की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं।


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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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