बलिया – क्या काम का नहीं बस नाम का है जनपद का ‘महिला थाना’?

बलिया डेस्क : जनपद में महिला थाना की स्थापना इसलिए की गई, ताकि पीड़ित महिलाएं अपनी हर पीड़ा और शिकायत महिला पुलिस के पास आसानी से दर्ज करा सकें, लेकिन आंकड़ों पर गौर करने से ऐसा कत्तई नहीं लगता कि महिला थाना खुलने से महिलाओं का कुछ भला हुआ है, 2012 में स्थापित महिला थाना में आज तक सिर्फ सात ही मुकदमे दर्ज हुए हैं।

जबकि घरेलू हिंसा, छेड़खानी व बलात्कार जैसे मामलों में बीते वर्षों की अपेक्षा ग्राफ बढ़ा है। आठ साल में सिर्फ सात मुकदमे के सवाल पर महिला थानाध्यक्ष कल्पना मिश्र ने सफाई दिया है कि अधिकांश मामलों का निबटारा कोतवाली व थानों में ही हो जाता है। बाकी मामले जैसे पति-पत्नी के बीच विवाद, सात-बहू के बीच विवाद में मुकदमा दर्ज करने के बजाय सुलह-समझौते के जरिए मामलों का निबटारा कर दिया जाता है।

जनपद बलिया में जब महिला थाना की स्थापना हुई तो महिलाओं को एक बल मिला, महिलाएं ये सोचने लगी कि चलो हम जो पीड़ा एक पुरूष थानाध्यक्ष को नहीं बता सकते, उस पीड़ा को महिला पुलिस के सामने रख सकते हैं और न्याय की गुहार लगा सकते हैं। लेकिन बीते आठ वर्षों में दर्ज हुए सिर्फ सात मुकदमे इस बात की तस्दीक करने के लिए काफी है कि आखिर महिला थाना महिलाओं को न्याय दिलाने में कितना काम आ रहा है।

कल्पना मिश्र ने लिया चार्ज तो कुछ सुधरी हालात – रोचक बात यह है कि 2012 में महिला थाना स्थापना के बाद 2019 तक सिर्फ तीन ही मुकदमे दर्ज हुए थे। इसमें पहले दो साल अर्थात 2012, 2013 व 2014 में जहां एक भी मुकदमा कायम नहीं हुआ, वहीं 2016 में एक, 2017 में फिर जीरो, 2018 में एक व 2019 में भी सिर्फ एक ही मुकदमा दर्ज हुआ। इसबीच महिला थाना की कमान संभाली तेजतर्रार महिला थानाध्यक्ष कल्पना मिश्रा ने कुछ बेहतर किया और इस साल यानी 2020 में जनवरी से लेकर अब तक चार मुकदमे दर्ज हुए हैं। इस प्रकार अब तक कुल सात मुकदमे दर्ज हुए हैं।

महिलाओं में जानकारी का अभाव – जनपद में भले ही महिला थाना की स्थापना हुए आठ वर्ष बीते गए हैं, लेकिन सच्चाई तो यही है कि अभी तक 70 प्रतिशत महिलाओं को ये पता नहीं कि जनपद में कहां किस छोर में महिला थाना है। ऐसे में जानकारी के अभाव में भी महिलाएं थाना तक नहीं पहुंच पाती है। वहीं इस इस मामले पर महिला थाना थानाध्यक्ष कल्पना मिश्र का कहना है कि अब तक सात मुकदमे दर्ज किए गए हैं। अधिकांश मामलों में आपसी सुलह-समझौते से मामले का रफ-दफा कर दिया जाता है।

रिपोर्ट- तिलक कुमार

 

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