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बलियाः सड़क हादसे में एक युवक की मौत, दूसरा घायल
बलिया के बांसडीह-मनियर मार्ग पर सड़क हादसा हो गया। इसमें एक युवक की मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक घायल है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक बांसडीह कस्बे के वार्ड नंबर 11 के निवासी शाहरूख खान (26) पुत्र शादिक खान अपने दोस्त रेवती निवासी श्रवण पटेल (18) पुत्र नन्हक पटेल के साथ घोंघा किसी रिश्तेदारी में गया था। वहां से रात करीब दस बजे वापस दोनों वापस लौट रहे थे। जानपुर गांव के सामने किसी अज्ञात वाहन ने इनकी बाइक में टक्कर मार दिया।
इससे दोनों युवक गंभीर रुप से घायल हो गए। युवकों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया। जिला अस्पताल में ईलाज के दौरान सोमवार सुबह शाहरुख खान की मौत हो गई। वहीं, श्रवण पटेल की हालत गंभीर होने पर वाराणसी रेफर कर दिया गया है। दोनो युवक अविवाहित है। शाहरुख तीन भाईयो में दूसरे नम्बर पर था। घटना से दोनों परिवार में कोहराम मचा है।
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फेफना में अकीदत के साथ मनाया गया मोहर्रम, मातमी जुलूस और हैरतअंगेज करतब बने आकर्षण का केंद्र
बलिया। फेफना थाना क्षेत्र में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। चिलचिलाती धूप के बावजूद फेफना सहित आसपास के गांवों में पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातमी दस्तों ने नोहा-ख्वानी और मातम कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
फेफना में निकले मातमी जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के युवाओं ने पारंपरिक हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन किया, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं समाजसेवी लडू अंसारी द्वारा जुलूस में शामिल लोगों और राहगीरों के लिए ठंडे शरबत की व्यवस्था की गई, जिसकी लोगों ने सराहना की।
जुलूस निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला पहुंचा, जहां परंपरागत रीति-रिवाज के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

फेफना के अलावा तीखा, मिठवार, पक्काकोट, बहादुरपुर, सिंहपुर, एकौनी, बलेजी, सागरपाली, अमडारी, निधरिया और मिढ्ढा गांवों में भी मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर थानाध्यक्ष अखिलेश चंद पांडेय पुलिस बल के साथ लगातार क्षेत्र में भ्रमण करते रहे और पूरे आयोजन पर नजर बनाए रखी। पर्व सकुशल संपन्न होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने बलेजी में लगे मेले का भी आनंद लिया।

ग्रामीणों ने कहा कि मोहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत, त्याग, सत्य और कुर्बानी का संदेश देने वाला अवसर है, जो समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द को मजबूत करता है।
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